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How to Take Care of Elderly Parents: अपने बुजुर्ग मां-बाप का कैसे रखें ख्याल? सिर्फ घर पैसे भेज देने से नहीं चलेगा काम, पैरेंट्स को सम्मान और अपनापन की होती है सबसे अधिक जरूरत

Tips To Take Care Of Elderly: आजकल इतनी बिजी लाइफ हो गई है कि लोगों के पास अपने बुजुर्ग मां-बाप तक के लिए समय नहीं है. अधिकांश नौकरी और व्यवसाय करने वाले लोग महीने में या साल में घर पर पैसे भेज देते हैं और समझते हैं कि उन्होंने पुत्र धर्म पूरा कर लिया जबकि ऐसा नहीं है. सिर्फ घर पैसे भेज देने से काम नहीं चलेगा क्योंकि पैरेंट्स को सम्मान और अपनापन की सबसे अधिक जरूरत होती है. 

How to Take Care of Elderly Parents How to Take Care of Elderly Parents

आजकल इतनी बिजी लाइफ हो गई है कि लोगों के पास अपने बुजुर्ग मां-बाप तक के लिए समय नहीं है. लोग काम के टेंशन में रिश्ते को टाइम देना भूल गए हैं.अधिकांश नौकरी और व्यवसाय करने वाले लोग अपने बुजुर्ग मां-बाप को घर-गांव में अकेले छोड़कर अपनी पत्नी और बच्चों के साथ बाहर शहर में रहते हैं. वे महीने में या साल में घर पर पैसे भेज देते हैं और समझते हैं कि उन्होंने पुत्र धर्म पूरा कर लिया जबकि ऐसा नहीं है. सिर्फ घर पैसे भेज देने से काम नहीं चलेगा क्योंकि पैरेंट्स को सम्मान और अपनापन की सबसे अधिक जरूरत होती है. बुजुर्ग मां-बाप चाहते हैं कि उनके बच्चे और नाती-पोते साथ में रहें. एक साथ खाना खाएं. उनसे बातचीत करें. लेकिन आजकल बुजुर्ग मां-बाप की देखभाल एक बड़ी सामाजिक चुनौती बनती जा रही है.

ऐसे रखें बुजुर्ग माता-पिता का ख्याल
1. दें भावनात्मक सहारा 
मां-बाप अपनी पूरी जिंदगी अपने बच्चों की अच्छी परवरिश में लगा देते हैं. वे जब बुजुर्ग होते हैं तो उन्हें अपनों के सहारे की उम्मीद होती है. ऐसे में बेटा-बेटी का अपने बुजुर्ग मां-बाप का ख्याल रखना सिर्फ पारिवारिक कर्तव्य नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी भी है. विशेषज्ञों के मुताबिका बुजुर्ग मां-बाप की देखभाल सिर्फ चंद रुपए उन्हें देने, दवा या भोजन तक सीमित नहीं है. सबसे पहले जरूरत है भावनात्मक सहारे की. बढ़ती उम्र के साथ अकेलापन, असुरक्षा और उपेक्षा की भावना बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशान करती है. दिन में कुछ समय उनके साथ बैठकर बातचीत करना, उनकी बातों को ध्यान से सुनना और अपने फैसलों में उनकी राय लेना उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है.

2. सेहत का रखें ध्यान 
उम्र बढ़ने के साथ कई बीमारियां भी बुजुर्ग माता-पिता को अपनी गिरफ्त में लेना चाहती हैं. ऐसे में अपने मां-बाप की सेहत का विशेष ध्यान रखें. नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं और समय पर दवाइयां दें. मा-बाप के खान-पान का ध्यान रखें. घर में साफ-सफाई और सुरक्षित माहौल बनाए रखें. यदि संभव हो तो अपने पास डॉक्टर का मोबाइल नंबर और मेडिकल रिकॉर्ड हमेशा अपने पास उपलब्ध रखें. कई लोग अपने बुजुर्ग मा-बाप को बीमार होने पर अस्पताल में भर्ती करा देते हैं. हालांकि हॉस्पिटल में नर्स और डॉक्टर्स उनकी अच्छी देखभाल करते हैं, लेकिन बुजुर्गों के जल्द स्वस्थ होने के लिए आप अपने घर को अस्पताल में बदल सकते हैं. यदि बुजुर्ग मां-बाप की स्थिति सामान्य है तो आप उनके लिए घर पर ही केयरटेकर रख सकते हैं. इससे आपके बुजुर्ग मां-बाप घर के माहौल में बेहतर महसूस करेंगे. घर के ग्राउंड फ्लोर पर ही अपने बुजुर्ग मां-बाप को रहने के लिए व्यवस्था करें. उन्हें कम से कम सीढ़ी चढ़ने-उतरने का मौका दें. उन्‍हें बताएं कि जब भी उठना हो तो झटके से न उठें. बाथरूम में उनके हिसाब से फिटिंग्स लगवाएं. इस तरह वे गिरने से बचे रहेंगे और मानसिक शारीरिक रूप से हमेशा हेल्‍दी भी रहेंगे.

3. ...तो नहीं शेयर करते अपनी परेशानी 
कुछ लोग अपने बुजुर्ग मां-बाप को छोटी-छोटी बात पर भी डांट देते हैं जो एकदम गलत है. ऐसे में बुजुर्ग मां-बाप अपनी किसी परेशानी को भी अपने बेटा-बेटी से शेयर नहीं करते हैं. आप अपने मां-बाप या घर में दादा-दादी हों तो उनसे उनकी समस्याओं के बारे में पूछें. इतना ही नहीं उनके साथ समय बिताते समय, उनकी आदतों को ध्यान से देखें. इससे आप आसानी से उनकी समस्याओं को दूर करने में सक्षम हो सकेंगे.

4. खूब सारी बातें करें 
यह ध्यान रखें कि बुजुर्ग मां-बाप को मेंटल सर्पोट की जरूर होती है. इस बात को हमेशा याद रखें कि जब आपको जरूरत थी तो उन्‍होंने आपको मेंटली सर्पोट किया था, आज जब उन्‍हें आपके सपोर्ट की जरूरत है तो आप भी आगे बढ़कर उनकी मदद करें. इसके लिए उनसे खूब सारी बातें करें और हमेशा साथ देने का भरोसा दिलाएं.

5. इस तरह से अपने बुजुर्ग मां-बाप के चेहरे पर ला सकते हैं मुस्कान 
एकल परिवारों के बढ़ते प्रचलन के कारण कई बार बुजुर्ग अकेले रह जाते हैं. ऐसे में तकनीक एक अच्छा सहारा बन सकती है. मोबाइल फोन, वीडियो कॉल और सोशल मीडिया के जरिए वे अपने बच्चों और रिश्तेदारों से जुड़े रह सकते हैं. साथ ही, पास-पड़ोस या सामाजिक समूहों से जुड़ाव उन्हें सक्रिय और खुश रखता है. कामकाजी संतान के लिए समय निकालना चुनौती हो सकता है, लेकिन छोटे-छोटे प्रयास बड़ा फर्क ला सकते हैं. सप्ताह में एक दिन अपने बुजुर्ग मां-बाप के साथ समय बिताएं. त्योहार साथ मनाएं. किसी पुराने शौक को फिर से जिंदा करना आपके बुजुर्ग मां-बाप के चेहरे पर मुस्कान ला सकता है.