Lemon Plant
Lemon Plant
घर पर लगाया गया नींबू का पौधा जब हरा-भरा तो दिखे, लेकिन उस पर न फूल टिकें और न फल आएं, तो निराशा होना स्वाभाविक है. अक्सर लोग सोचते हैं कि पौधे में कोई बड़ी कमी है या महंगे खाद की जरूरत है, जबकि हकीकत में समस्या छोटे कीटों और मिट्टी में पोषक तत्वों के असंतुलन से जुड़ी होती है. समय रहते इन कारणों को पहचान लिया जाए, तो पौधे को दोबारा स्वस्थ और फलदार बनाया जा सकता है.
नींबू के पौधे में फल न लगने के पीछे मुख्य रूप से दो वजहें होती हैं. पहली, कीटों का हमला और दूसरी, मिट्टी में नाइट्रोजन की अधिकता. जब पौधे को ज्यादा नाइट्रोजन वाला फर्टिलाइजर मिल जाता है, तो वह केवल पत्तियां और नई टहनियां बनाने लगता है. ऐसे में फूल आने के बाद भी वे टिक नहीं पाते और झड़ जाते हैं. दूसरी ओर, छोटे-छोटे कीड़े नई टहनियों और फूलों का रस चूस लेते हैं, जिससे फूल काले पड़कर गिर जाते हैं और फल बनने की प्रक्रिया रुक जाती है.
काम की है 10 रुपए की फिटकरी
गार्डनिंग एक्सपर्ट्स के अनुसार, नींबू के पौधे की इस समस्या का समाधान किसी महंगे केमिकल में नहीं, बल्कि सिर्फ 10 रुपए की फिटकरी और कुछ घरेलू चीजों में छिपा है. सही तरीके से तैयार किया गया फिटकरी का घोल न केवल कीटों को दूर करता है, बल्कि पौधे की ऊर्जा को पत्तियों से हटाकर फूल और फल बनाने की दिशा में मोड़ देता है.
फिटकरी का असरदार घोल कैसे बनाएं
इस घरेलू घोल को बनाने के लिए केवल तीन चीजों की जरूरत होती है मट्ठा, फिटकरी और शैंपू. सबसे पहले एक लीटर पानी में करीब 50 मिली मट्ठा मिलाएं. इसके बाद फिटकरी का एक छोटा टुकड़ा इस पानी में लगभग दो मिनट के लिए डालें और तय समय बाद निकाल लें. अंत में एक रुपये वाला शैंपू का पाउच मिला दें. बस, इतना करते ही नींबू के पौधे के लिए असरदार स्प्रे तैयार हो जाता है.
सही समय और सही तरीका है सबसे जरूरी
घोल का असर तभी दिखेगा, जब इसका उपयोग सही तरीके से किया जाए. इसे स्प्रे बोतल में भरकर शाम के समय या तब छिड़कें, जब धूप तेज न हो. पत्तियों के ऊपर और नीचे, तने और टहनियों पर अच्छी तरह स्प्रे करें, ताकि कीट पूरी तरह खत्म हो जाएं. जरूरत पड़ने पर यह छिड़काव 7 से 10 दिन के अंतराल पर दोहराया जा सकता है.
फिटकरी क्यों करती है कमाल?
फिटकरी में मौजूद एल्युमिनियम और सल्फेट पौधे में क्लोरोफिल बनने की प्रक्रिया को संतुलित रखते हैं और उसकी ऊर्जा को फूलों की ओर मोड़ने में मदद करते हैं. इससे नई ग्रोथ केवल पत्तियों तक सीमित न रहकर फलों की ग्रोथ में बदलने लगती है.