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सड़क का वाहन एक्सीडेंट कभी भी और किसी के साथ भी हो सकता है. ऐसे समय में वाहन इंश्योरेंस फाइनेंशियल सेफ्टी देने का काम करता है. लेकिन कई लोगों को यह नहीं पता होता कि एक्सीडेंट के बाद इंश्योरेंस क्लेम कैसे किया जाए. सही प्रोसेस के जरिए आप बिना किसी परेशानी के अपना क्लेम ले सकते हैं. लेकिन इसके बारे में जानकारी लोगों को नहीं होती.
किसी भी हादसे के बाद सबसे जरूरी है अपनी और दूसरों की सेफ्टी जरूरी होती है. यदि किसी को चोट लगी हो तो तुरंत मेडिकल मदद बुलाएं. इसके बाद वाहन को सेफ जगह पर ले जाने की कोशिश करें.
अगर एक्सीडेंट में ज्यादा नुकसान हुआ है या कोई दूसरा वाहन भी शामिल हैं, तो पुलिस को जानकारी देने में देरी न करें. जिससे फौरन एफआईआर हो सके. साथ ही एक्सीडेंट स्पॉट की फोटो और वीडियो जरूर लें. अगर कोई गवाह मौजूद हो तो उसका नाम और नंबर भी नोट कर लें. ये आगे जरूर काम आएगा.
भारत में वाहन एक्सीडेंट से जुड़े क्लेम मुख्य रूप से मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत किए जाते हैं. इस कानून के अनुसार एक्सीडेंट पीड़ित मुआवजे का दावा कर सकते हैं. गंभीर चोट या मृत्यु की स्थिति में कुछ मामलों में फौरन मुआवजे का भी प्रावधान है.
एक्सीडेंट होने के बाद जितनी जल्दी हो सके अपनी इंश्योरेंस कंपनी को सूचना दें. अधिकांश कंपनियां 24 से 48 घंटे के भीतर जानकारी देने की शर्त रखती हैं. कस्टमर केयर पर कॉल करके क्लेम दर्ज कराएं और क्लेम नंबर सेव रखें. आजकल कई कंपनियां मोबाइल ऐप और वेबसाइट के जरिए भी ऑनलाइन क्लेम की सेवा देती हैं.
इंश्योरेंस क्लेम की प्रोसेस में सही डॉक्यूमेंट बेहद जरूरी होते हैं. आमतौर पर पॉलिसी की कॉपी, वाहन का आरसी, ड्राइविंग लाइसेंस, एफआईआर की कॉपी, एक्सीडेंट हुए वाहन की तस्वीरें और रिपेयर का अनुमान या बिल मांगा जाता है. दस्तावेजों में कोई कमी या गलत जानकारी क्लेम प्रोसेस में देरी करवा सकती है.
क्लेम दर्ज होने के बाद इंश्योरेंस कंपनी एक सर्वेयर अपॉइंट करती है. उसका काम वाहन को हुए नुकसान का आकलन करना होता है. ध्यान रखें कि सर्वेयर की जांच से पहले वाहन की मरम्मत शुरू न कराएं. सर्वेयर की रिपोर्ट के आधार पर ही क्लेम राशि तय होती है. मरम्मत के दौरान सभी बिल और रसीदें संभालकर रखें.
कुछ गलतियां आपके क्लेम को कैंसल कर सकती हैं. जैसे एक्सीडेंट की सूचना देरी से देना, शराब पीकर वाहन चलाना, वैध ड्राइविंग लाइसेंस न होना या पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन करना. इसके अलावा गलत या अधूरी जानकारी देना भी क्लेम रिजेक्शन का बड़ा कारण बन सकता है.