सिगरेट के आकार का डस्टबिन
सिगरेट के आकार का डस्टबिन
जहां पूरी दुनिया प्रदूषण को लेकर परेशान है, वहीं सूरत के कुछ जागरूक स्टूडेंट्स ने एक अनोखी पहल से सबका ध्यान खींचा है. 'सार्वजनिक यूनिवर्सिटी' के इन स्टूडेंट्स ने साबित कर दिया है कि अगर आपमें कचरे को खूबसूरत चीज़ों में बदलने की इच्छाशक्ति हो, तो कोई ज़हरीला कचरा भी काम आ सकता है. इस ग्रुप ने शहर से सिगरेट के बट (यानी पिछला हिस्सा) इकट्ठा करके उन्हें रिसायकल किए गए कागज़ समेत खूबसूरत चीज़ों में बदलने का मुश्किल काम शुरू किया है.
सालों में होता है डिकम्पोज
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में लाखों सिगरेट के बट सड़कों और नालियों में फेंक दिए जाते हैं. सिगरेट के फिल्टर सेलुलोज एसिटेट से बने होते हैं. जिसे कुदरती तौर पर घुलने में सालों लग जाते हैं और यह मिट्टी और पानी को बहुत नुकसान पहुंचाता है. सूरत के जय मेहता (फाउंडर), संयम दगली (लीडरशिप), तन्वी प्रजापति, लिप्सा पदशाला, डॉ. प्रतीक पटेल (प्रोफेसर), हर्ष धोलिया और जैनामी लानिया ने इस समस्या को अवसर में बदल दिया है.
यह प्रोजेक्ट सिर्फ़ कचरा इकट्ठा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें साइंटिफिक तरीकों का इस्तेमाल किया गया है. पूरे शहर में सिगरेट के आकार के खास डस्टबिन रखे गए हैं, ताकि लोग अपना कचरा वहीं फेंकें. इकट्ठा किए गए फिल्टर को एक केमिकल प्रोसेस से डिटॉक्सिफाई किया जाता है. प्यूरिफिकेशन के बाद, उनसे रीसायकल पेपर, ऊन, फोटो फ्रेम, बुकमार्क, डायरी और कीचेन जैसे आकर्षक प्रोडक्ट बनाए जाते हैं.
सिगरेट के आकार के डस्टबिन
शहर में सिगरेट के आकार के डस्टबिन रखकर लोगों में जागरूकता फैलाने की कोशिश की गई है. सूरत के इन स्टूडेंट्स की मेहनत आज पर्यावरण प्रेमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है. इसमें कोई शक नहीं कि यह छोटी सी कोशिश आने वाले समय में पर्यावरण में बड़े बदलावों की नींव रखेगी. इस बारे में जय मेहता ने कहा कि सरकार की SSIP (स्टूडेंट स्टार्टअप एंड इनोवेशन पॉलिसी) स्टार्टअप के तहत कॉलेज में यह प्रोजेक्ट शुरू किया है. हम इसके ज़रिए पर्यावरण के बारे में जागरूकता भी फैला रहे हैं.
आप पहाड़ पर जाएं या कहीं और, आपको वहां सिगरेट के टुकड़े मिलते हैं और इससे पर्यावरण को भी नुकसान होता है. तो उसी के हिसाब से, हमने इसका सॉल्यूशन लाने के लिए इसे रिसायकल करना शुरू किया है. हम इससे रिसायकल पेपर बना रहे हैं. इस पेपर से आर्टिस्टिक प्रोडक्ट और दूसरे स्टेशनरी प्रोडक्ट बनाए जा रहे हैं. साथ ही, हम इसके अंदर बीज भी इस्तेमाल करते हैं, ताकि अगर कभी हमें यह पेपर भी फेंकना पड़े, तो हम इससे प्लांटेशन कर सकें और पौधे उगा सकें. हमारे पास ज़्यादातर सड़क पर बहुत सारी सिगरेट पड़ी रहती हैं. तो हमने सोचा कि जो सिगरेट सड़क पर गिरती हैं और कई सालों बाद खराब हो जाती हैं, उनसे हम कुछ काम की चीज़ बना सकते हैं जिससे हम वेस्ट को रिसायकल कर सकें और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को भी कम कर सकें.
कठिनाइयों से भरा है काम
इस अभियान से जुड़े संयम दगली ने कहा कि सबसे मुश्किल हिस्सा है कलेक्शन. क्योंकि हमें पत्तों के ढेर पर जाकर उन्हें इकट्ठा करना होता है. लोगों का POV (पॉइंट ऑफ़ व्यूज़) और जजमेंट अलग-अलग होते हैं. कई बार हम लोगों के सिगरेट पीने तक का इंतज़ार करते है कि वहां से लोग सिगरेट खत्म करके बची हुई बट्स फेंक दें, फिर हम उसे उठाते हैं. लोगों को नहीं पता कि हम इस काम से क्या कर रहे हैं, इसलिए लोगों के जजमेंट बहुत ऊंचे होते हैं, जिसकी वजह से हमें इस पूरे प्रोसेस में कलेक्शन सबसे मुश्किल हिस्सा लगता है. हमने कई जगहों पर सिगरेट के कचरे के लिए डस्टबिन भी रखे हैं, लेकिन लोगों को पता नहीं है. लोग उनमें सिगरेट नहीं फेंकते. हम लोग आज काम कर रहे हैं, मैं और मेरी टीम को पूरे सूरत का सपोर्ट चाहिए. क्योंकि हम यह काम अकेले नहीं कर सकते, हमें आपकी मदद भी चाहिए ताकि हम इसे एक जैसे तरीके से इकट्ठा कर सकें और आगे बढ़ सकें.
- संजय सिंह राठौड़ की रिपोर्ट