Kanpur News
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एक जमाना था, जब गांव में लाठी किसानों की पहचान हुआ करती थी. अब तो गांव भी शहरीकरण की जद में आ गए हैं. इससे लाठी बहुत कम नजर आती है. फिर भी उत्तर प्रदेश के कन्नौज में गिल्ली डंडा खेल रहा एक दसवीं का छात्र दीवार के ऊपर से कूदते समय मैदान में खड़ी लाठी की चपेट में ऐसे आया कि लाठी उसके पेट में ही घुस गई. घर वाले पहुंचे तो खून बह रहा था. उसको गाड़ी से लेकर कन्नौज की तिर्वा मेडिकल कॉलेज गए.
डॉक्टरों का इलाज से इनकार तो पहुंचे कानपुर-
लेकिन उसकी स्थिति देखकर वहां के डॉक्टरों ने उसका ऑपरेशन करने से मना कर दिया. इसके बाद घर वाले उसको लेकर कानपुर पहुंचे, जहां सर्जन बृजेंद्र यादव ने एक प्राइवेट नर्सिंग होम में इलाज करने का बीड़ा उठाया और उसका कई घंटे की मेहनत के बाद अपनी टीम के साथ सफल ऑपरेशन करके इंच इंच काटकर उसकी लाठी को निकाल कर उसकी जान बचा ली.
खेल-खेल में हो गया बड़ा हादसा-
कन्नौज का रहने वाला विशाल हाई स्कूल का छात्र है. 31 तारीख को वह अपने दोस्तों के साथ एक प्लांट में गिल्ली डंडा खेल रहा था, तभी एक दीवार पर चढ़कर गिल्ली पकड़ने की कोशिश कर रहा था, तभी वह दीवार के ऊपर से गिरा और नीचे मैदान में गड़ी एक लाठी पर गिर गया. लाठी उसके पेट में घुसकर कंधे से निकल कर फंस गई. आसपास खड़े लोगों ने तुरंत घरवालों को सूचना दी. इसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया.
बेटे को बचा लीजिए डॉक्टर साहब- मां
कानपुर के सीनियर सर्जन बृजेश यादव ने विशाल की हालत देखी. उन्होंने लड़के की मां विनीता से बात की. मां ने कहा कि मेरे लिए तो मेरा बेटा एक तरीके से जा ही रहा है. आप किसी भी तरह कोई भी ऑपरेशन करिए, जो करना चाहे करिए, उसकी जान बचाइए.
5 घंटे के ऑपरेशन के बाद बची जान-
डॉक्टर बृजेश यादव का कहना है कि मरीज को लोग एम्बुलेंस से आए थे. हमारी आठ डॉक्टरों और कर्मचारियों की टीम ने उसका ऑपरेशन शुरू किया. रात को 11:00 बजे ऑपरेशन शुरू किया जो सुबह 4:00 बजे तक चला. इस दौरान दो-दो एनेस्थीसिया के डॉक्टर भी मौजूद रहे. हार्ट के डॉक्टर भी मौजूद रहे. आखिर ऑपरेशन सही हुआ और बच्चे की जान बचा ली गई.
7 दिन अस्पताल में रहा लड़का- डॉक्टर
डॉक्टर बृजेश यादव का कहना है कि हमने पहले पेट से बाहर जो 5 फुट की लाठी निकली हुई थी, उसको ग्राइंडर से काटा, क्योंकि ऑपरेशन थिएटर में उसको नहीं ले जाया जा सकता था. इसके बाद पेट में तीन फीट जो लाठी घुसी थी, उसको हमने यह स्टेज की बनाई की एक-एक इंच करके काटते जाएंगे और जो भी डैमेज हो रहा है, उसको ठीक करते जाएंगे. ऑपरेशन सफल हुआ. विशाल को हमने 7 दिन अपने हॉस्पिटल में रखा. उसके बाद उसको डिस्चार्ज कर दिया. बुधवार को उसको चेक करके डॉक्टर बृजेश यादव ने पूरी तरह फिट बता दिया. इस दौरान बच्चे की मां विनीता का कहना है डॉक्टर साहब हमारे लिए भगवान है. हम जिंदगी भर उनके मुरीद रहेंगे.
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