Khandwa news
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मध्य प्रदेश के खंडवा में जनसुनवाई में डॉगी की खबर जिस तरह से सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. उसे लेकर नगर निगम में प्रतिपक्ष नेता दीपक (मुल्लू) राठौर खासे चर्चा में हैं. हमारी एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि दरअसल वे खुद और उनके साथ डॉगी बनकर जनसुनवाई में गए युवक दोनों ही डॉग बाइट का शिकार हो चुके हैं. इस मुद्दे को लेकर उन्होंने पहले भी कई बार शासन-प्रशासन के समक्ष समस्या के निदान की गुहार लगाई थी. लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. इसके बाद उन्होंने मुद्दे उठाने का तरीका बदल दिया.
जनसुनवाई में अनोखा नजारा-
खंडवा कलेक्टर सभागृह में जनसुनवाई के दौरान अनोखा नजारा देखने को मिला. एक शख्स डॉगी का मुखौटा लगाकर पहुंच गया. इस शख्स की शिकायत कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनकी नसबंदी पर खर्च को लेकर था. शिकायत का ये अनोखा तरीका काफी चर्चा में रहा. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.
4 साल 13 हजार से ज्यादा मामले-
खंडवा नगर में पिछले चार वर्षों में डॉग बाइट के 13 हजार 225 के मामले सामने आये है. नगर निगम इन कुत्तों के बधियाकरण पर चालीस लाख रुपयों से ज्यादा का खर्च कर चुका है, बावजूद नतीजा सिफर है. वर्ष 2026 में ही जनवरी से जुलाई तक सात महीनों में ही 2463 व्यक्ति डॉग बाइट के शिकार हो चुके है.
नगर निगम की उदासीनता-
खंडवा में नेशनल रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम के तहत स्वास्थ्य विभाग इन आंकड़ों को दर्ज करता है और घायलों का उपचार भी उसके जिम्मे है. इधर आवारा कुत्तों के खिलाफ कार्यवाही की जिम्मेदारी नगर निगम की है. नगर निगम अपने कार्य के प्रति कितना गंभीर है. उसकी मिसाल यह है कि इस वर्ष के सात माह बीत जाने के बावज़ूद अभी तक कुत्तों के बधियाकरण और वैक्सीनेशन के जो टेंडर निकाले गए है, उसकी एजेंसी तक तय नहीं हो पाई है.
नगर निगम के पास कुत्तों का आंकड़ा नहीं-
शहर में कुत्तो की संख्या कितनी है? उसका आंकड़ा तक नगर निगम के पास मौजूद नहीं है. इस सम्बन्ध में शासन ने जो गाइडलाइन दी है, उसके मुताबिक शहर की आबादी के अनुपात में 3 प्रतिशत संख्या आवारा कुत्तों की मानी जाती है. इस तरह पौने तीन लाख की आबादी वाले खण्डवा में कुत्तों की संख्या 9 हजार से ज्यादा आंकी गई है.
यह समस्या लगातार विकराल हो रही है. लेकिन जनहित से जुड़े इस मुद्दे के प्रति कोई गंभीर नहीं दिखा. नगर निगम के प्रतिपक्ष नेता दीपक (मुल्लू ) राठौर ने जब यह विषय प्रभावी और रोचक तरीके से उठाया तो हड़कंप मच गया. ये वीडियो सोशल मीडिया में खूब वायरल हुआ तो प्रशासन भी एक्टिव हुआ.
जनसुनवाई पब्लिक स्टंट के लिए नहीं- कलेक्टर
जनसुनवाई में कलेक्टर की अनुपस्थिति में एडिशनल कलेक्टर काशीराम बड़ोले ने इस शिकायत को न केवल धैर्यपूर्वक सुना, बल्कि इसमें जाँच कमेटी बनाकर कार्यवाही की बात भी कही. बाद में कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने कहा कि जनसुनवाई समस्याओं के निराकरण का गंभीर मंच है, यहाँ पब्लिसिटी के लिए स्टंट नहीं किया जाना चाहिए. सामान्य तरीके से भी यह बात रखी जा सकती थी. बड़ा सवाल यही है कि सामान्य तरीके से रखी गई समस्याओं का निराकरण हो ही जाता तो यह नौबत क्यों आती?
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