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35 रुपये लेकर आया मुंबई, आज कमाता 75 करोड़ सालाना... जानें कैसे एक पाव भाजी बेचने वाला बना करोड़पति!

आज हम आपको ऐसे ही व्यक्ति की कहानी बताने जा रहे हैं, जो 13 साल की उम्र में केवल 35 रुपये लेकर मुंबई पहुंचा था लेकिन आज सालाना लगभग 75 करोड़ रुपये कमाते हैं. जी हां, हम बात कर रहे हैं नारायण टी पुजारी के बारे में. तो चलिए आज आपको नारायण टी पुजारी की दिलचस्प कहानी बताते हैं.

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 Narayan t poojari Narayan t poojari

कई ऐसे लोग हैं जो मुंबई में अपने सपनों को पूरा करने पहुंचते हैं, यही कारण है कि मुंबई को सपनों की नगरी कहा जाता है. आज हम आपको ऐसे ही व्यक्ति की कहानी बताने जा रहे हैं, जो 13 साल की उम्र में केवल 35 रुपये लेकर मुंबई पहुंचा था लेकिन आज सालाना लगभग 75 करोड़ रुपये कमाते हैं. जी हां, हम बात कर रहे हैं नारायण टी पुजारी के बारे में. तो चलिए आज आपको नारायण टी पुजारी की दिलचस्प कहानी बताते हैं.

कर्नाटक में एक साधारण शुरुआत
नारायण टी पुजारी का जन्म कर्नाटक के उडुपी जिले के एक छोटे से गांव गुज्जड़ी में हुआ था. उनका परिवार आर्थिक रूप से संघर्ष था. बचपन से ही नारायण ने जिम्मेदारी और कठिनाइयों से घिरे हुए थे. महज 13 साल की उम्र में उन्होंने परिवार का सहारा बनने के लिए घर छोड़ने का फैसला किया. जेब में सिर्फ 35 रुपये लेकर वे मुंबई के लिए ट्रेन में सवार हो गए, उन्हें इस बात का कोई अंदाजा नहीं था कि अवसरों और संघर्षों से भरे इस शहर में उनका क्या इंतजार कर रहा है.

होटलों में बर्तन किया साफ
मुंबई ने नारायण टी पुजारी का आराम से स्वागत नहीं किया. उन्होंने दक्षिण मुंबई की छोटी कैंटीनों और होटलों में लंबे समय तक काम किया. यहां वे बर्तन धोते, फर्श साफ करते और मेजें साफ करते. फिर भी नारायण ने कभी शिकायत नहीं की. उनके द्वारा कमाया गया हर रुपया मायने रखता था, क्योंकि उनका लक्ष्य साफ था- जीवित रहना, सीखना और अपने परिवार को घर पैसे भेजना.

रात को जाते थे स्कूल
थकान के बावजूद, नारायण टी पुजारी ने एक साहसिक फैसला लिया. दिन भर काम करने के बाद उन्होंने रात वाली स्कूल में दाखिला लिया. जब दूसरे आराम कर रहे थे, तब वे पढ़ाई कर रहे थे, इस विश्वास के साथ कि शिक्षा उनका भविष्य बदल सकती है. काम और पढ़ाई को संतुलित करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपना ध्यान केंद्रित रखा. रात्रि विद्यालय ने धीरे-धीरे उनके आत्मविश्वास और सोच को बेहतर बनाया. इसने उन्हें दिहाड़ी मजदूरी से परे सपने देखने में भी मदद की. फिर उन्हें एहसास हुआ कि केवल कड़ी मेहनत ही पर्याप्त नहीं है.  

1990 में नारायण टी पुजारी ने उठाया बड़ा कदम
नारायण टी पुजारी ने मुंबई के फोर्ट इलाके में एक छोटी सी आइसक्रीम की दुकान खोली. दुकान साधारण थी और पैसों की तंगी थी. नारायण खाना बनाने से लेकर सफाई तक सब कुछ खुद ही संभालते थे. एक दिन, एक ग्राहक ने मेनू में पाव भाजी जोड़ने का सुझाव दिया. उस साधारण से सुझाव ने सब कुछ बदल दिया और एक ऐसे ब्रांड की नींव रखी जो आगे चलकर मशहूर हुआ.

पाव भाजी ने बदली जिंदगी  
जैसे ही पाव भाजी को मेनू में शामिल किया गया, ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी. प्लेटें झटपट बिक जाती थीं और बिक्री लगातार बढ़ती गई. नारायण टी पुजारी ने ग्राहकों की पसंद पर बारीकी से नजर रखी और शहर की खानपान की आदतों को समझा. उन्होंने महसूस किया कि मुंबई के लोग नियमित रूप से मिलने वाले आरामदायक भोजन को पसंद करते हैं. समय के साथ, पाव भाजी उनके व्यवसाय का केंद्र बन गई. जो एक छोटी सी शुरुआत थी, वह जल्द ही लोगों के बार-बार लौटने का मुख्य कारण बन गई.

मुंबई के बदलते रूप के साथ-साथ नारायण टी पुजारी भी बदलते गए. 2000 के दशक की शुरुआत में उन्होंने मेनू में पिज्जा और फ्यूजन डिश भी शामिल किए. फिर भी, पाव भाजी उनकी सबसे लोकप्रिय डिश बनी रही. उन्होंने अपने रेस्टोरेंट का नाम शिव सागर रखा, जहां उन्होंने गुणवत्ता और किफायती दाम पर विशेष ध्यान दिया. समय के साथ कीमतें बढ़ीं, लेकिन स्वाद और सेवा में कोई कमी नहीं आई.

सालाना लगभग 75 करोड़ रुपये की कमाई
2020 की योरस्टोरी रिपोर्ट के अनुसार, शिव सागर सालाना लगभग 75 करोड़ रुपये कमाते हैं. फिर भी, नारायण टी पुजारी सफलता को अलग तरह से परिभाषित करते हैं. उनका मानना ​​है कि जब उनके पास कुछ नहीं था, तब मुंबई ने उन्हें सब कुछ दिया. 35 रुपये से शुरुआत करके शहर के सबसे लोकप्रिय भोजनालयों में से एक को चलाने तक, उनकी यह यात्रा कड़ी मेहनत का उदाहरण है. आज भी, वे उसी ईमानदारी के साथ खाना परोसते हैं, जिसके साथ उन्होंने शुरुआत की थी.

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