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महिला की अनोखी शवयात्रा! आगे-आगे हाथी, पीछे-पीछे भगवान राम और कृष्ण की झांकी

यूपी के संभल में 74 साल की महिला की अनोखी शवयात्रा निकाली गई. शवयात्रा में आगे-आगे हाथी चल रहे थे तो पीछे-पीछे भगवान राम और कृष्ण की झांकी भी दिखाई दे रही थी. इसके साथ ही सैकड़ों ट्रैक्टर भी शवयात्रा में नजर आए.

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उत्तर प्रदेश के संभल में 74 साल की महिला की अनोखी शव यात्रा देखने के लिए मिली है. जहां महिला की शवयात्रा में आगे-आगे हाथी थे तो पीछे-पीछे 74 वर्षीय महिला की अर्थी थी. जबकि अर्थी के पीछे भगवान शिव और कृष्ण की झांकी के साथ ही सैकड़ों ट्रैक्टरों का काफिला था. लेकिन महिला की शव यात्रा में शामिल हाथी कोई किराए पर मंगाये गए हाथी नहीं, बल्कि वह मृतक महिला के पालतू हाथी मोहन और परमा थे. महिला की अंतिम यात्रा निकली तो उसके पालतू हाथी भी उसके अंतिम सफर में साथ-साथ चलते हुए दिखाई दिए.

74 साल की महिला की अनोखी शवयात्रा-
दरअसल रजपुरा थाना इलाके के ब्यौरा गांव की रहने वाली 74 वर्षीय रामबेटी देवी को तीन दिन पहले तबीयत खराब होने पर अलीगढ़ के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. लेकिन बुधवार सुबह उनकी मौत हो गई. रामबेटी देवी की मौत की खबर सुनकर आसपास के इलाकों से ग्रामीणों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया. मृतक महिला के दोनों बेटों मनवीर और चरन सिंह ने अंतिम संस्कार की तैयारी की.

शवयात्रा में शामिल हुए पालतू हाथी-
शवयात्रा में घर के पालतू 2 हाथी मोहन और परमा भी महिला की अंतिम यात्रा में शामिल हुए. ब्यौरा गांव से रामबेटी देवी की शव यात्रा शुरू होकर 15 किलोमीटर दूर राजघाट तक गई. राम बेटी देवी की शव यात्रा गांव से शुरू होकर राजघाट गंगा घाट तक पहुंची तो अर्थी के आगे-आगे दोनों पालतू हाथी मोहन और परमा चल रहे थे.

शवयात्रा में राम-कृष्ण की झांकी-
शवयात्रा में सिर्फ हाथी ही शामिल नहींथे. इसमें भगवान शिव और कृष्ण की झांकी भी थी. अर्थी के आगे हाथी चल रहे थे तो पीछे पीछे ट्रैक्टर पर भगवान शिव और कृष्ण की झांकी के साथ ही कई सौ ट्रैक्टरों का काफिला था. इसी तरह से हाथी, झांकी और ट्रैक्टर के काफिले के साथ राम बेटी देवी की अंतिम यात्रा राजघाट गंगा घाट तक पहुंची. इस दौरान मृतक महिला राम बेटी देवी की अंतिम शवयात्रा में लगभग 1000 लोग शामिल हुए.

उदास हो गए दोनों हाथी- बेटा
रामबेटी देवी के बेटे मनवीर ने बताया कि हमारे पिताजी के 2012 में चले जाने के बाद हमारी मां ने दोनों हाथी मोहन और परमा को काफी प्यार से पाला था. मां का दोनों हाथियों के प्रति काफी लगाव था और दोनों ही हाथी परिवार के सदस्य की तरह रहते हैं. इसलिए मोहन और परमा हाथी को भी अंतिम यात्रा में ले गए थे. मनवीर का कहना है कि उनके परिवार को आसपास के इलाके में हाथी वाले परिवार के रूप में जाना जाता है. लेकिन मां की मौत के बाद से दोनों हाथी मोहन और परमा काफी उदास है.

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