Image credit: Brantley Hall/University of Maryland
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अगर आप सोचते हैं कि दिन में 5-10 बार गैस पास करना नॉर्मल है, तो ये रिसर्च आपको चौंका सकती है. वैज्ञानिकों ने एक ऐसी स्मार्ट अंडरवियर बनाई है जो इंसान के फार्ट यानी गैस छोड़ने की संख्या रिकॉर्ड करती है. इस रिसर्च में पता चला कि लोग जितना समझते हैं, उससे कहीं ज्यादा बार गैस पास करते हैं. कुछ लोग दिन में 30 से ज्यादा बार फार्ट करते पाए गए, जबकि एक व्यक्ति ने तो 175 बार तक गैस छोड़ी.
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के प्रोफेसर ब्रैंटली हॉल और उनकी टीम इस पर रिसर्च कर रही है. उनका कहना है कि इंसानी गैस को लेकर मेडिकल साइंस में अब तक बहुत कम रिसर्च हुई है और ज्यादातर जानकारी 1980 के दशक की पुरानी स्टडी पर आधारित है.
इंसानों में सामान्य रूप से कितनी गैस बनती है?
अब वैज्ञानिकों ने तकनीक की मदद से एक नया तरीका निकाला है. उन्होंने Human Flatus Atlas नाम का प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसका मकसद यह समझना है कि इंसानों में सामान्य रूप से कितनी गैस बनती है.
कैसे काम करती है स्मार्ट अंडरवियर?
वैज्ञानिकों ने एक छोटे सिक्के के आकार का सेंसर तैयार किया है, जिसे अंडरवियर में लगाया जाता है. यह सेंसर दिनभर गैस को रिकॉर्ड करता है और डेटा मोबाइल ऐप में भेज देता है. यह डिवाइस खासतौर पर हाइड्रोजन गैस को पहचानती है, जो हमारे पेट में बैक्टीरिया द्वारा खाना पचाने के दौरान बनती है. वैज्ञानिक भविष्य में दूसरे गैसों को भी ट्रैक करने की तैयारी कर रहे हैं.
रिसर्च में क्या पता चला?
2025 में प्रकाशित एक स्टडी में 38 लोगों ने इस स्मार्ट अंडरवियर को कम से कम 3 दिन तक रोज 11 घंटे से ज्यादा समय तक पहना. रिसर्च में सामने आया कि एक हेल्दी व्यक्ति औसतन 32 बार गैस पास करता है. हालांकि सभी लोगों में यह संख्या अलग-अलग थी. कुछ लोग दिन में सिर्फ 4 बार फार्ट करते थे, जबकि कुछ 59 बार तक. वैज्ञानिकों के पास एक ऐसा मामला भी आया जिसमें व्यक्ति ने एक दिन में 175 बार गैस छोड़ी. दिलचस्प बात यह रही कि कई लोगों का खानपान एक जैसा था, फिर भी उनके फार्ट की संख्या में बड़ा अंतर था.
गलती से हुई थी खोज
प्रोफेसर हॉल ने बताया कि इस सेंसर की खोज भी काफी मजेदार तरीके से हुई. उनकी टीम माइक्रोबायोलॉजी लैब में काम कर रही थी, लेकिन मशीन सही से काम नहीं कर रही थी. तभी किसी ने मजाक में सेंसर के सामने गैस पास कर दी और मशीन ने तुरंत सिग्नल पकड़ लिया. यहीं से वैज्ञानिकों को इस तकनीक पर काम करने का आइडिया मिला.
लोगों को पहनने में नहीं होती दिक्कत
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस डिवाइस को पहनना बिल्कुल आरामदायक है. इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि बैठने या चलने में कोई परेशानी नहीं होती. टीम ने कई आकार और मटेरियल टेस्ट किए, तब जाकर गोल आकार को सबसे बेहतर माना गया.
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