pahadi noon
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'पहाड़ी नून' का नाम तो आपने भी कई बार जरूर सुना होगा, ये वही नमक है जिसे पहाड़ों में महिलाएं बनाकर महीनों तक स्टोर करती हैं. इतना ही नहीं टूरिस्ट इसे पहाड़ों से खरीदकर भी लाते हैं. असल में इस नमक को पिस्योन-नून कहा जाता है. इस नमक को इसका नाम इसके बनने की प्रक्रिया के चलते दिया गया है, जिसमें इसे सिलबट्टे पर एकदम बारीक पीसा जाता है. पहाड़ी इलाकों में इस नमक को रायता, फल, दही, मट्ठा और रोटी के साथ खाया जाता है.
क्या होता है पहाड़ी नमक?
पहाड़ी नमक को पिस्यू लूण भी कहा जाता है. यह कोई साधारण नमक नहीं, बल्कि मसालों और जड़ी-बूटियों का खास मेल है. पहाड़ी इलाकों में इसे पुराने समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है. अगर आपने इसे एक बार बना लिया तो आपके घर में लोग बार-बार इसे बनाने की डिमांड करेंगे. तो आइए जानते हैं इसकी आसान रेसिपी के बारे में.
पहाड़ी नमक बनाने की विधि
सबसे पहले हरे लहसुन और हरे धनिया को धो लें और पानी को सुखाकर इसे काट लें. अब लहसुन की कलियां, अदरक को छील लें और हरी मिर्च के डंठल हटा दें. अब कटा हुआ हरा लहसुन, धनिया, भुना हुआ जीरा, अदरक और हरी मिर्च सहित सारे इनग्रेडिएंट्स एक साथ लें और सारी चीजों को आप नमक के साथ मिलाकर सिलबट्टे में अच्छी रह से पीस लें. आप चाहें तो इसे मिक्सर पर भी पीस सकते हैं, लेकिन सिलबट्टे पर पीसने से इसका स्वाद दोगुना हो जाता है.
अब इस पीसे हुए पाउडर को एक बाउल में निकालकर 1-2 दिन तक धूप में रखें. अगर बारिश के दिनों में बना रहे हैं, तो आप इसे ओवन या एयर-फ्रायर में भी हल्की आंच पर सुखा सकते हैं. ऐसा करने से इसमें मौजूद नमी निकल जाएगी. जब पाउडर अच्छी तरह से ड्राई हो जाए तो किसी एयरटाइट कंटेनर में भर लें. आप इसका 3-4 महीने तक आराम इस्तेमाल कर सकते हैं.
कैसे करें इस नमक को इस्तेमाल
इस नमक को आप फलों, सलाद, चाट, पराठे, पकौड़ों और स्नैक्स पर छिड़क कर खा सकते हैं. बता दें कि, कई लोग इसे खाना खाने के बाद पाचन के लिए भी इस्तेमाल करते हैं.
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