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भारत में होकर भी विदेशी है ये गांव, नहीं चलता रुपया... एंट्री के लिए दिखाना होता है पासपोर्ट

इस क्षेत्र में रहने वाले लोग बांग्लादेश के नागरिक हैं और यहां बांग्लादेशी प्रशासन की कई सुविधाएं उपलब्ध हैं. स्थानीय लोग बांग्लादेशी मुद्रा टका का इस्तेमाल करते हैं. यहां के स्कूल, अस्पताल और अन्य सरकारी सेवाएं भी बांग्लादेश से संचालित होती हैं. मोबाइल नेटवर्क और दैनिक जीवन भी काफी हद तक बांग्लादेश से जुड़ा हुआ है.

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क्या आप जानते हैं कि देश के भीतर ही एक ऐसी जगह मौजूद है, जहां भारतीय नागरिकों को जाने के लिए विशेष अनुमति लेनी पड़ सकती है? सुनने में यह अजीब लग सकता है, लेकिन यह पूरी तरह सच है. तो चलिए आपको बताते हैं इस अजब-गजब गांव के बारे में.

पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में स्थित तीन बीघा कॉरिडोर और दहा ग्राम-आंगरपोटा क्षेत्र अपनी अनोखी भौगोलिक और प्रशासनिक व्यवस्था के कारण चर्चा में रहते हैं. यह इलाका भारत की सीमा के भीतर है, लेकिन यहां का दैनिक जीवन और प्रशासन बांग्लादेश से जुड़ा हुआ है.

क्या है तीन बीघा कॉरिडोर?
तीन बीघा कॉरिडोर लगभग 178 मीटर लंबा और 85 मीटर चौड़ा एक संकरा रास्ता है. भारत सरकार ने वर्ष 1992 में इसे बांग्लादेश को उपयोग के लिए सौंपा था, जबकि बाद में इसे दीर्घकालिक व्यवस्था के तहत संचालित किया गया. इसका उद्देश्य बांग्लादेश के दहा ग्राम-आंगरपोटा क्षेत्र को मुख्य भूमि से जोड़ना था. वर्ष 2015 में भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा समझौते के बाद अधिकांश एन्क्लेव समाप्त हो गए, लेकिन दहा ग्राम-आंगरपोटा की विशेष स्थिति बनी रही.

क्यों खास है यह इलाका?
इस क्षेत्र में रहने वाले लोग बांग्लादेश के नागरिक हैं और यहां बांग्लादेशी प्रशासन की कई सुविधाएं उपलब्ध हैं. स्थानीय लोग बांग्लादेशी मुद्रा टका का इस्तेमाल करते हैं. यहां के स्कूल, अस्पताल और अन्य सरकारी सेवाएं भी बांग्लादेश से संचालित होती हैं. मोबाइल नेटवर्क और दैनिक जीवन भी काफी हद तक बांग्लादेश से जुड़ा हुआ है.

भारतीयों के लिए अलग नियम
सुरक्षा कारणों से इस इलाके में आने-जाने पर विशेष निगरानी रखी जाती है. भारतीय सुरक्षा बल सीमा पर तैनात रहते हैं और बिना अनुमति प्रवेश की कोशिश करने वालों को रोका जा सकता है. पर्यटकों और आम नागरिकों को यहां जाने से पहले स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेने की सलाह दी जाती है.

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण
करीब 20 हजार लोगों की आबादी वाला यह क्षेत्र भारत-बांग्लादेश सीमा की संवेदनशीलता के कारण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. यही वजह है कि यहां सुरक्षा व्यवस्था सख्त रहती है. भारत में स्थित होने के बावजूद यह इलाका अपनी अलग पहचान और विशेष व्यवस्था के कारण लोगों के लिए हमेशा कौतूहल का विषय बना रहता है.

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