Feeling Sleepy while studying
Feeling Sleepy while studying
अक्सर लोग जैसे ही पढ़ाई करने बैठते हैं, उन्हें नींद आने लगती है. यह कोई नई नहीं, बल्कि आम बात है. कई बार स्टूडेंट्स पूरे मन से पढ़ाई करना शुरू करते हैं. लेकिन कुछ देर बाद आंखें भारी होने लगती हैं. किताब सामने होती है, लेकिन ध्यान पढ़ाई से हटने लगता है. लेकिन किताबों और नींद के बीच का कनेक्शन आखिर क्या है?
जब हम लंबे समय तक पढ़ाई करते हैं तो हमारा दिमाग लगातार एक्टिवली काम करता रहता है. खासकर जब कोई नया और टफ सब्जेक्ट समझना हो, तब दिमाग को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. लगातार ध्यान लगाने से लोग मेंटली थक जाते हैं. इसका असर नींद और सुस्ती के रूप में दिखाई दे सकता है.
अगर आप लंबे समय तक केवल किताब पढ़ते हैं और खुद से सवाल नहीं करते, तो पढ़ाई थोड़ी बोरिंग लग सकती है. ऐसी पढ़ाई में दिमाग की एक्टिवनेस कम हो सकती है. इसी वजह से नींद आने लगती है. पढ़ाई को मजेदार बनाने के लिए जरूरी बातें लिखें, खुद से सवाल पूछें और पढ़े हुए टॉपिक को अपनी लैंग्वेज में समझाने की कोशिश करें.
कई बार बिस्तर पर बैठकर या लेटकर पढ़ने से भी नींद जल्दी आ सकती है. बहुत आरामदायक जगह शरीर को आराम करने का इशारा देती है. इससे दिमाग पढ़ाई के बजाय आराम और नींद की तरफ जाने लगता है. इसलिए पढ़ाई के लिए टेबल और कुर्सी जैसी जगह बेहतर रहती है. ऐसी जगह बैठकर जब आप पढ़ते हैं, तो कमर सीधी रहते हैं, पोस्चर भी ठीक होता है और नींद भी नहीं आती.
अगर रात में आपकी नींद पूरी नहीं हुई है तो दिन में पढ़ाई करते समय नींद आना आम बात है. लगातार कम सोने से शरीर की थकान जमा होती रहती है. इसका असर ध्यान लगाने और नई चीजें याद रखने की पावर पर साफ तौर पर दिखाई देता है. इसलिए एग्जाम की तैयारी के दौरान रातभर जागने के बजाय अच्छी नींद लेना जरूरी है.
कई बार पढ़ाई का प्रेशर और एग्जाम की टेंशन भी शरीर और दिमाग को थका सकती है. कई बार टेंशन के कारण व्यक्ति खुद को लगातार थका हुआ महसूस करता है. ऐसे में किताब खोलते ही ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है और नींद आने लगती है.