10 दिन तक चले गणेशोत्सव का आज समापन हो रहा है. अनंत चतुर्दशी के मौके पर देशभर में गणपति बप्पा की विदाई की जा रही है. सुबह से ही मुंबई, पुणे समेत कई शहरों में गणेश प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए ले जाते श्रद्धालुओं की तस्वीरें सामने आ रही हैं.
कहीं ढोल-ताशों के साथ भक्त नाचते नजर आ रहे हैं, तो कहीं विशाल झांकियों और सजे हुए ट्रकों के साथ बप्पा को विदाई दी जा रही है. सड़कों पर 'गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ' के जयकारे गूंज रहे हैं.
हर साल गणेशोत्सव के दौरान शहरों का माहौल पूरी तरह बदल जाता है. बड़े-बड़े पंडाल, रोशनी, लेजर लाइट्स, सजावट और ऊंची आवाज में बजते संगीत के बीच लाखों लोग उत्सव में शामिल होते हैं.
गणेशोत्सव अब सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बड़े सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले चुका है. हालांकि, इस भव्यता के बीच कई लोगों को पुराने समय का वह गणेशोत्सव भी याद आता है, जब उत्सव का केंद्र छोटी मूर्ति, मोहल्ले के लोग और परिवार के साथ बिताए पल हुआ करते थे.
आज गणेश विसर्जन के साथ अनंत चतुर्दशी भी मनाई जा रही है. इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु का यह स्वरूप अनंत यानी जिसका कोई अंत नहीं है, उस रूप का प्रतीक माना जाता है. इसलिए इस दिन गणेश विसर्जन के साथ भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व है.
पौराणिक मान्यता के अनुसार, गणपति उत्सव के 10 दिन भक्तों के बीच रहने के बाद बप्पा विसर्जन के साथ अपने धाम कैलाश लौट जाते हैं. भक्त उन्हें विदाई देते हुए अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करते हैं.
मान्यता है कि गणपति अपने साथ भक्तों के घर से विघ्न और नकारात्मकता लेकर जाते हैं और पीछे सुख, समृद्धि और शुभता का आशीर्वाद छोड़ जाते हैं.
गणेश विसर्जन से जुड़ी एक पौराणिक मान्यता महाभारत के लेखन से भी जुड़ी है. कहा जाता है कि महर्षि वेदव्यास ने भगवान गणेश को महाभारत लिखने के लिए कहा था. लगातार लेखन कार्य पूरा होने के बाद गणेश जी ने शीतल जल में स्नान किया था. इसी वजह से विसर्जन की परंपरा को लेकर भी धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं.