देवाधिदेव महादेव के प्रिय सावन मास की शुरुआत के साथ ही संगम नगरी प्रयागराज पूरी तरह शिवमय हो गई है. तड़के से ही दशाश्वमेध घाट पर हजारों शिवभक्तों की भीड़ उमड़ने लगी, जहां श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना की और कांवड़ में पवित्र गंगाजल भरकर 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयघोष के साथ अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हो गए.
सावन के पहले दिन प्रयागराज के दारागंज स्थित दशाश्वमेध घाट पर सुबह से ही कांवड़ियों का पहुंचना शुरू हो गया. उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने सबसे पहले मां गंगा में स्नान कर स्वयं को पवित्र किया. इसके बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का स्मरण किया और अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगी. कई श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और समर्पण के प्रतीक के रूप में उठक-बैठक लगाकर भोलेनाथ से सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद भी मांगा.
पूजा-अर्चना पूरी होने के बाद श्रद्धालुओं ने अपनी कांवड़ में गंगा का पवित्र जल भरा और भगवान शिव के जयघोष के साथ अपने-अपने शिवधामों की ओर प्रस्थान किया. भगवा वस्त्रों में सजे शिवभक्तों की लंबी कतारें और गंगा तट पर गूंजते 'बोल बम' के उद्घोष ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया.
प्रयागराज का दशाश्वमेध घाट हर वर्ष सावन के दौरान लाखों शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है. यहां से कांवड़िये गंगाजल लेकर अपने-अपने क्षेत्रों के शिवालयों में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने जाते हैं.
मान्यता है कि सावन में गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. यही वजह है कि पूरे महीने यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ बनी रहती है. आने वाले दिनों में कांवड़ यात्रा के चरम पर पहुंचने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है.