How every state welcomes New Year in unique ways
How every state welcomes New Year in unique ways
भारत अपनी विविधता और समृद्ध परंपराओं के लिए दुनिया भर में जाना जाता है. यहां एक ही दिन अलग-अलग राज्यों में नववर्ष अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है. 14 और 15 अप्रैल को देश के कई हिस्सों में नए साल का स्वागत होता है, लेकिन हर जगह इसकी झलक, रीति-रिवाज और उत्सव का तरीका बिल्कुल अलग होता है. ये त्योहार न केवल मौसम और कृषि से जुड़े हैं, बल्कि संस्कृति और आस्था का भी प्रतीक हैं. तो चलिए आपको बताते हैं भारत में किस जगह पर कैसे नए साल का स्वागत किया जाता है.
पंजाब में बैसाखी का उत्साह
पंजाब में बैसाखी को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. यह केवल फसल कटाई का त्योहार नहीं, बल्कि सिख धर्म के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण दिन है. इसी दिन गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी. लोग गुरुद्वारों में जाकर अरदास करते हैं, भांगड़ा और गिद्दा नृत्य करते हैं और नई फसल के लिए आभार जताते हैं और इस दिन को नए साल के रूप में मनाते हैं.
तमिलनाडु में पुथांडु की परंपरा
तमिलनाडु में पुथांडु यानी तमिल नववर्ष की शुरुआत सुबह जल्दी उठकर स्नान और पूजा से होती है. ‘कन्नी’ देखने की परंपरा बेहद खास मानी जाती है. घरों को फूलों और आम के पत्तों से सजाया जाता है. इस दिन खास तौर पर आम की बनी ‘मैंगो पचड़ी’ तैयार की जाती है, जो जीवन के विभिन्न स्वादों का प्रतीक है.
पश्चिम बंगाल में पोहेला बोइशाख की रौनक
पश्चिम बंगाल में पोहेला बोइशाख बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. लोग मंदिर जाते हैं, पारंपरिक भोजन का आनंद लेते हैं और एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं. ‘शोर्षे इलिश’ और रसगुल्ला जैसे व्यंजन इस दिन खास होते हैं. सांस्कृतिक कार्यक्रम और रंगीन जुलूस इस त्योहार की खास पहचान हैं.
केरल में विषु का धार्मिक महत्व
केरल में विषु का त्योहार बहुत धार्मिक महत्व रखता है. ‘विषु कनी’ देखने की परंपरा इस दिन का मुख्य आकर्षण है. लोग सुबह उठते ही शुभ वस्तुओं का दर्शन करते हैं. इसके बाद परिवार के साथ विशेष भोज किया जाता है और रात में आतिशबाजी भी होती है.
असम में बोहाग बिहू की मस्ती
असम में बोहाग बिहू नए साल और कृषि मौसम की शुरुआत का प्रतीक है. यह तीन दिनों तक चलता है. लोग पारंपरिक नृत्य करते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और ‘पीठा’ जैसे व्यंजन बनाते हैं. परिवार और समाज के साथ मिलकर खुशियां बांटी जाती हैं.
मणिपुर में साजिबु चैराओबा का उत्सव
मणिपुर में साजिबु चैराओबा नववर्ष के रूप में मनाया जाता है. लोग पूजा करते हैं, रिश्तेदारों से मिलते हैं और पारंपरिक व्यंजन ‘इरोम्बा’ बनाते हैं. यह त्योहार नई शुरुआत और कृषि चक्र से जुड़ा हुआ है.
इन सभी त्योहारों में भले ही रीति-रिवाज अलग हों, लेकिन भावना एक ही है. नई शुरुआत, समृद्धि और खुशहाली. भारत की यही विविधता इसे खास बनाती है, जहां अलग-अलग रंग मिलकर एक खूबसूरत सांस्कृतिक तस्वीर बनाते हैं.
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