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11 हजार लीटर दूध से अभिषेक, 41 टन हवन का सामान.. 21 दिन के महायज्ञ का भव्य समापन, Video Viral

मध्य प्रदेश के सीहोर में पातालेश्वर महादेव मंदिर में 5 एकड़ के विशाल पंडाल में 21 दिनों तक महायज्ञ हुआ. इसके समापन के मौके पर 11 हजार लीटर दूध से मां नर्मदा का अभिषेक किया गया. इस आयोजन के दौरान हवन के लिए 41 टन सामग्री का इस्तेमाल किया गया.

Sehore News Sehore News

मध्य प्रदेश के सीहोर में पातालेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित आर्मिक अनुष्ठान का भव्य समापन हुआ. इस दौरान 11 हजार लीटर दूध से मां नर्मदा का अभिषेक कियाा गया. इसके साथ ही महाहवन में 41 टन सामग्री का इस्तेमाल हुआ. इसके साथ ही 21 दिन के भव्य महायज्ञ का समापन हुआ. भेरूंदा तहसील क्षेत्र सातदेव में पातालेश्वर महादेव मंदिर है. जिसने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया. दूध से विधिवत पूजन-अभिषेक सम्पन्न हुआ.

11000 लीटर दूध से अभिषेक-
पातालेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित विशाल धार्मिक अनुष्ठान का समापन के मौके दूध के टैंकर से करीब 11 हजार लीटर दूध द्वारा माँ नर्मदा का अभिषेक किया गया. दूध से विधिवत पूजन-अभिषेक सम्पन्न हुआ. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसकी खूब चर्चा हो रही है.

21 दिन के भव्य आयोजन का समापन-
धार्मिक आयोजन की शुरुआत 18 मार्च से हुई थी. इस दौरान रोजाना 21 क्विंटल हवन सामग्री का इस्तेमाल किया गया. पूरे आयोजन के दौरान करीब 41 टन हवन सामग्री, जड़ी-बूटियों के साथ सोना-चांदी की आहुतियां दी गईं.

महायज्ञ में शामिल श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में नारियल अर्पित कर पुण्य लाभ अर्जित किया. समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन भी हुआ, जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया.

5 एकड़ में बनाया गया था विशाल पंडाल-
बताया गया है कि आयोजन संत शिवानंद महाराज के द्वारा कराया गया था. आयोजन को लेकर करीब 5 एकड़ क्षेत्र में विशाल पंडाल तैयार किया गया था. रंग-बिरंगी रोशनी, घंटियों की गूंज और दीपों की जगमगाहट ने आयोजन को विशेष आकर्षण प्रदान किया.

क्या है धार्मिक कथा-
बताया गया है सातदेव क्षेत्र को प्राचीन काल से सप्त ऋषियों की तपोभूमि माना जाता है. मान्यता है कि ब्रह्माजी के मानस पुत्र सप्तऋषियों ने यहां कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव पातालेश्वर महादेव के रूप में प्रकट हुए. ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र गोंड शासकों के अधीन रहा और बाद में अहिल्याबाई होल्कर द्वारा यहां निर्माण कार्य कराए जाने से इसकी धार्मिक महत्ता और बढ़ गई.

(नावेद जाफरी की रिपोर्ट)

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