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Akola Mahakali Temple: अकोला के 200 साल पुराने महाकाली मंदिर में नवरात्रि की अनूठी परंपरा, मराठी-हिंदी आरती से गूंज रहा दरबार, आराधना के लिए उमड़ रहे श्रद्धालु

अकोला के राजराजेश्वर मंदिर परिसर स्थित प्राचीन मां महाकाली मंदिर में नवरात्रि के दौरान आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है. फूलों और आभूषणों से सजीं माता रानी की प्रतिमा, मराठी और हिंदी में होने वाली आरती और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था इस मंदिर की विशेष पहचान हैं. मां महाकाली के सौम्य स्वरूप के दर्शन कर भक्त आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं.

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Akola Mahakali Temple Akola Mahakali Temple

शारदीय नवरात्रि 2026 में हर तरफ आस्था की गूंज है. मां दुर्गा के मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है. नवरात्रि का त्योहार शक्ति की उपासना, भक्ति और साधना का महापर्व है. महाराष्ट्र के अकोला में आराध्य देवता राजराजेश्वर मंदिर परिसर स्थित 200 साल से भी अधिक पुराने मां महाकाली मंदिर में नवरात्रि के दौरान भक्ति का अनूठा माहौल देखने को मिल रहा है. यहां माता रानी की आराधना और साधना के लिए श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा के साथ पहुंच रहे हैं.

खास बात यह है कि मंदिर में मराठी और हिंदी में माता की आरती करने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है. मां महाकाली का यह स्वरूप अपने पारंपरिक रौद्र रूप से अलग सौम्य और शांत दिखाई देता है. महाराष्ट्र के कासार समाज के लिए माता महाकाली कुलदेवी के रूप में विशेष आस्था का केंद्र हैं. राजराजेश्वर मंदिर परिसर स्थित प्राचीन मां महाकाली मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का विशेष वातावरण बना हुआ है. मान्यता और परंपरा के अनुसार, यह मंदिर 200 साल से भी अधिक पुराना है. नवरात्रि के इन पावन दिनों में भक्त माता रानी के दर्शन करने, पूजा-अर्चना करने और अपनी मनोकामनाओं के साथ आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं.

फूलों और आभूषणों से सजीं मां महाकाली
माता रानी के दरबार की भव्यता भी भक्तों का ध्यान आकर्षित कर रही है. मां महाकाली को सुंदर फूलों, मखमली ओढ़नी और सोने-चांदी के आभूषणों से सजाया गया है. माता का यह रूप श्रद्धालुओं के मन में श्रद्धा, शांति और आत्मिक विश्वास का भाव जगाता है. आमतौर पर मां महाकाली की कल्पना उनके शक्तिशाली और रौद्र स्वरूप में की जाती है, लेकिन इस मंदिर में माता का सौम्य स्वरूप भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है. श्रद्धालु इसी शांत और दिव्य स्वरूप के दर्शन कर भावविभोर हो रहे हैं.

मराठी और हिंदी में आरती करते हैं श्रद्धालु
मंदिर की एक खास परंपरा है यहां मराठी और हिंदी में माता रानी की आरती है. पिछले कई वर्षों से नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु नियमित रूप से आरती और पूजा-अर्चना में शामिल होते आ रहे हैं. आरती के समय भक्त माता की भक्ति में लीन नजर आते हैं. घंटियों की गूंज, आरती के स्वर और माता के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठता है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामूहिक भक्ति से जुड़ने का अवसर भी है.

कासार समाज की कुलदेवी के रूप में विशेष आस्था
मां महाकाली महाराष्ट्र के कासार समाज के लिए कुलदेवी के रूप में विशेष धार्मिक महत्व रखती हैं. पीढ़ियों से चली आ रही इस आस्था के चलते नवरात्रि के दौरान माता के दर्शन और आराधना का विशेष महत्व रहता है. श्रद्धालु माता के चरणों में शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करते हैं.