unique Ganpati pappa
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अकोला में गणेशोत्सव के दौरान 'राजा के गणपति' पंडाल की झांकी श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. यहां गणपति बप्पा के साथ उनके वाहन मूषक राज को अलग-अलग रूपों में दिखाया गया है. खास बात यह है कि पंडाल समिति ने पर्यावरण संरक्षण के लिए पिछले दो साल से गणपति प्रतिमा का विसर्जन नहीं किया है.
मूषक राज के अलग-अलग रूपों ने खींचा ध्यान
अकोला के गोरक्षण रोड स्थित 'राजा के गणपति' पंडाल में इस बार गणपति बप्पा की भव्य प्रतिमा के सामने तैयार की गई झांकी लोगों को खासा आकर्षित कर रही है. झांकी में भगवान गणेश के वाहन मूषक राज को अलग-अलग रूपों में दिखाया गया है. कहीं मूषक आरती करते नजर आ रहे हैं, तो कहीं ताल-मृदंग और ढोल बजाते हुए भक्ति में लीन दिखाई दे रहे हैं.
झांकी में कुछ मूषक नृत्य करते हुए भी नजर आते हैं. वहीं, दो मूषक गणपति बप्पा को पालकी में विराजमान कर उनकी शोभायात्रा निकालते दिखाई दे रहे हैं. पालकी में विराजमान बप्पा और उनके साथ चल रहे मूषक राज का यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बना हुआ है. पूरी झांकी में भक्ति के साथ पारंपरिक गणेशोत्सव की झलक देखने को मिलती है.
दो साल से नहीं किया जा रहा गणपति विसर्जन
'राजा के गणपति' पंडाल की खास पहल सिर्फ झांकी तक सीमित नहीं है. पंडाल समिति ने जल प्रदूषण को रोकने के लिए पिछले दो वर्षों से गणपति बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन नहीं करने का फैसला लिया है. समिति ने आगे भी प्रतिमा विसर्जन नहीं करने का निर्णय लिया है.
पंडाल अध्यक्ष सुधीर रांदल और अन्य पदाधिकारियों की ओर से पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए यह पहल की गई है. गणेशोत्सव की आस्था के साथ पर्यावरण बचाने का संदेश देने वाली यह पहल श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है.
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