Lord Shri Ram
Lord Shri Ram
राम नाम को सनातन धर्म में सर्वोच्च माना गया है. धर्मग्रंथों के अनुसार राम नाम का जाप करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. श्रीराम की स्तुतियों को करने से साधक की सभी कामनाएं पूरी हो जाती हैं और जीवन-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है.
भगवान राम की प्रथम स्तुति: संस्कार और शांति
भगवान राम की पहली स्तुति 'श्रीरामचंद्र कृपालु भजमन' तुलसीदास जी द्वारा लिखित विनय पत्रिका में उल्लेखित है. यह स्तुति भगवान राम के स्वरूप और गुणों का वर्णन करती है. नियमित रूप से इसका जाप करने से मन पवित्र होता है और परिवार में सुख-शांति का वास होता है. विशेषज्ञों का मानना है कि संध्या काल में घी का दीपक जलाकर पूरे परिवार के साथ इसका जाप करने से गरीबी और संकटों का नाश होता है.
प्रभु राम की दूसरी स्तुति: स्वास्थ्य और आयु का संरक्षण
श्रीराम रक्षा स्रोत भगवान राम की दूसरी स्तुति है, जो अकाल मृत्यु और भय बाधाओं से रक्षा करती है. इसका पाठ सुबह स्नान के बाद जल भरकर करने से शरीर और मन की सुरक्षा होती है. यह स्तुति विशेष रूप से स्वास्थ्य संकट और आयु वृद्धि के लिए अचूक मानी जाती है.
भगवान राम की तीसरी स्तुति: समाज में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा
भगवान राम की तीसरी स्तुति 'जय राम रमा रमन शमन' उत्तर कांड में भगवान शिव द्वारा की गई है. यह स्तुति राज्य पद, नौकरी और प्रतिष्ठा प्राप्ति के लिए अत्यंत प्रभावी है. शाम के समय इसका जाप करने से आर्थिक समस्याओं का नाश होता है और परिवार में सुख-शांति का वास होता है.
प्रभु राम की चौथी स्तुति: विवाद और युद्ध में विजय
भगवान राम की चौथी स्तुति 'आदित्य हृदय स्रोत' रामायण के युद्ध कांड में वर्णित है. यह स्तुति विवाद, मुकदमे और युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए अचूक मानी जाती है. प्रातः काल सूर्य को जल अर्पित कर इसका जाप करने से जीवन में सफलता और तरक्की होती है.
राम नाम की महिमा
राम नाम केवल दो अक्षरों का नहीं, बल्कि यह एक महामंत्र है. राम नाम का जाप जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और सभी समस्याओं का समाधान प्रदान करता है. धर्म ग्रंथों के अनुसार, राम नाम में वेदों और उपनिषदों के मंत्रों की शक्ति समाहित है.
राम के आदर्श और जीवन मूल्य
भगवान राम का जीवन आदर्श पिता, भाई, पति और राजा के रूप में प्रेरणादायक है. प्रभु राम ने अपने जीवन मूल्यों से यह उदाहरण प्रस्तुत किया कि इंसान जन्म से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से श्रेष्ठ बनता है. राम राज्य की परिकल्पना न्याय, समानता और करुणा पर आधारित है.