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Bhai Dooj 2026: 10 या 11 नवंबर 2026? जानिए भाई दूज और गोधन पूजा की उत्तम तारीख, जानें दोनों का महत्व

साल 2026 में भाई दूज और गोधन का त्योहार 2026 में कब मनाया जाएगा इस बात को लेकर इस बार भी लोग फ्यूजन हैं. दरअसल भाई बहन के प्रेम को समर्पित ये त्यौहार कार्तिक मास की शुक्ल द्वितीया तिथि को मनाई जाती है. दो दिन ये तिथि होने के कारण लोग तारीख को लेकर परेशान हैं. जानें भाई दूज और गोधन की सटिक तारीख.

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Bhai Dooj 2026 में कब है Bhai Dooj 2026 में कब है

भाई दूज भाई-बहन के प्यार को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और प्यारा त्योहार है. इस दिन बहनें स्नान करके अपने भाइयों को तिलक लगाती हैं, मिठाई खिलाती हैं और उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करती हैं. वहीं, बिहार और आसपास के कुछ क्षेत्रों में गोधन की परंपरा भी निभाई जाती है. इसमें बहनें जमीन पर गोबर से यमराज और उनकी बहन यमुना की आकृतियां बनाकर पूजा करती हैं. दीप जलाकर, रूई से बनी माला, फूल, बजरी, गड़ी, मटर, सुपारी, केराव और मिठाई अर्पित की जाती है. इसके बाद गोधन कूटने की रस्म निभाई जाती है. कूटी हुई बजरी भाई को खिलाई जाती है और पूजा में चढ़ाई गई माला पहनाकर उसके दीर्घायु होने की कामना की जाती है.

2026 में कब है भाई दूज और गोधन?
साल 2026 में भाई दूज या गोधन का त्योहार 11 नवंबर, बुधवार को मनाया जाएगा. यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है. पंचांग के अनुसार द्वितीया तिथि 10 नवंबर को दोपहर करीब 2 बजे शुरू होकर 11 नवंबर को दोपहर करीब 3:53 बजे समाप्त होगी. भारतीय संस्कृति में उदया तिथि का महत्व है. इसलिए 11 तारीख को त्योहार मनाना ज्यादा शुभ रहेगा.

भाई दूज की पौराणिक कथा क्या है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है. इसकी प्रचलित कथा सूर्यदेव के पुत्र यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ी है. कहा जाता है कि यमुना अपने भाई यमराज से मिलने की इच्छा रखती थीं. एक दिन यमराज अपनी बहन के घर पहुंचे. यमुना ने उनका स्वागत किया, तिलक लगाया और प्रेमपूर्वक भोजन कराया. 

बहन के स्नेह और आतिथ्य से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वरदान मांगने के लिए कहा. यमुना ने कामना की कि इस दिन जो भाई अपनी बहन के घर जाकर उससे तिलक करवाए और उसका स्नेह प्राप्त करे, उसे अकाल मृत्यु का भय न रहे. तभी से भाई दूज पर बहन के हाथों तिलक करवाने और भाई की लंबी उम्र की कामना करने की परंपरा प्रचलित मानी जाती है और तब से मान्यता है कि इस दिन भाइयों को बहनों के घर भोजन करना चाहिए.

गोधन कूटने के पीछे क्या मान्यता है?
गोधन कूटने की रस्म बिहार और आसपास के कुछ क्षेत्रों की लोकपरंपरा से जुड़ी है. इसमें गोबर से यमराज और यमुना की आकृतियां बनाकर उनकी पूजा की जाती है. उनकी आकृतियों के साथ कुछ और चीजें भी बनाई जाती हैं. बहनें भाई की लंबी उम्र और रक्षा की कामना करती हैं. पूजा के बाद बजरी कूटने और उसे भाई को खिलाने की परंपरा निभाई जाती है. कुछ परिवारों में भाई को पूजा में चढ़ाई रूई से बनाई गई माला भी पहनाई जाती है.
 

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