Eco-Friendly Ganesha Idol
Eco-Friendly Ganesha Idol
खाना खाने के बाद अक्सर कई लोग सौंफ, सुपारी, इलायची या लौंग का सेवन करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन्हीं चीजों से गणेशजी की मूर्ति भी बनाई जा सकती है? महाराष्ट्र के वाशिम जिले के एक गणेश मंडल ने ऐसा ही अनोखा प्रयोग किया है. वाशिम जिले के कारंजा शहर के भाजी बाजार परिसर में स्थित श्रीमंत बाल हौसी गणेश मंडल ने हर वर्ष की तरह इस बार भी पर्यावरण पूरक गणेशजी की मूर्ति तैयार की है. यह मूर्ति देखने में बेहद सुंदर होने के साथ-साथ अपनी खास बनावट की वजह से भी अलग है. इस गणेश प्रतिमा को बनाने में रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली खाने की चीजों का इस्तेमाल किया गया है.
15 किलो सुपारी और 5 किलो सौंफ का इस्तेमाल
मूर्ति को तैयार करने में करीब 15 किलो सुपारी, 5 किलो सौंफ और लगभग 1 किलो लौंग और इलायची का इस्तेमाल किया गया है. इन चीजों से तैयार की गई गणेशजी की यह प्रतिमा लोगों के लिए खास आकर्षण बनी हुई है. श्रीमंत बाल हौसी गणेश मंडल ने पिछले साल भी इसी तरह का अनोखा प्रयोग किया था. तब मंडल की ओर से रोजमर्रा के जीवन में खाई जाने वाली दालों से गणेशजी की मूर्ति बनाई गई थी.
70 से 80 किलो है गणेशजी की प्रतिमा का वजन
सौंफ, सुपारी, इलायची और लौंग से तैयार की गई गणेशजी की आकर्षक मूर्ति का वजन करीब 70 से 80 किलो है. इस प्रतिमा को तैयार करने में लगभग 15 से 20 दिन का समय लगा है. मूर्ति की खास बात सिर्फ इसका अनोखा निर्माण ही नहीं है, बल्कि इसे पर्यावरण पूरक भी रखा गया है. श्रीमंत बाल हौसी गणेश मंडल की यह मूर्ति पूरी तरह पर्यावरण पूरक है. इसके साथ ही मंडल की ओर से गणेशजी के विसर्जन के समय डीजे का इस्तेमाल भी नहीं किया जाता है.
बच्चों में दिख रहा खास उत्साह
श्रीमंत बाल हौसी गणेश मंडल में गणेश उत्सव को लेकर बच्चों में खासा उत्साह दिखाई देता है. इस अनोखी गणेश प्रतिमा को तैयार करने में रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजों का उपयोग किया गया है, जिससे मंडल की मूर्ति इस बार भी अपने अलग अंदाज के कारण खास नजर आ रही है.
(इनपुट- ज़का खान)
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