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Ganesh Chaturthi: तापी में विराजमान होते है बप्पा, नाव से जाकर बीच नदी में होती है पूजा.. आखिर क्या है इसके पीछे की वजह?

सूरत के गणेश भक्तों ने अनोखे अंदाज में तापी नदी में भगवान गणेश की मूर्ति विराजमान की है. बप्पा की पूजा के लिए वह नाव में सवार होकर जाते है.

Lord Ganesh In Tapi River (Source: Social Media) Lord Ganesh In Tapi River (Source: Social Media)

गणेश उत्सव के अवसर पर सूरत शहर के अलग-अलग इलाकों में छोटी बड़ी 80 हज़ार से ज़्यादा गणेश प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं. घर-घर में गणपति बप्पा मोरया की गूंज सुनाई दे रही है. गणेशोत्सव के सार्वजनिक आयोजन पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं. आलीशान मंडपों, सजावटी लाइटिंग और थीम आधारित समारोहों के साथ सेवा गतिविधियां शुरू हो गई हैं. वहीं, शहर के रांदेर इलाके के युवाओं ने अपने मोहल्ले में भगवान गणेश की स्थापना करने के बजाय तापी नदी में तैरता हुआ मंडप तैयार कर भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना की है.

सूर्य पुत्री तापी नदी के बीचों बीच एक विशेष प्रकार का दीपक स्वरूप मंडप तैयार किया गया है और इस मंडप में भगवान गणेश की मूर्ति को स्थापना किया गया है. गणेश चतुर्थी से देश भर में गणेश उत्सव की शुरुआत हो चुकी है. अलग-अलग गणेश पंडालों में भगवान गणेश के रंग रूप में नजर आ रहे है तो सूर्य पुत्री तापी नदी की गोद में भगवान गणेश की स्थापना आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. 

कैसे तैयार किया गया है मंडप?
सूरत के रांदेर इलाके में मछुवारा समुदाय के लोगों ने इस बार सूरत शहर के मध्य से गुजरने वाली तापी के बीच मे भगवान गणेश की स्थापना की है. करीबन 350 से 400 किलो वजन उठा सके इस तरह की प्लास्टिक शीट पर भगवान गणेश का छोटा सा पंडाल बनाया है. इसे एंगल के जरिये नदी में लॉक किया गया है. इस तरह के आयोजन को लेकर मूर्ति स्थापना करने वाले लोगों ने बताया कि 2006 में सूरत में भारी बाढ़ आई थी और काफी नुकसान हुआ था. तब विघ्नहर्ता से निवेदन किया गया था कि लोगों को बाढ़ से बचाये और उसके बाद से मछुआरा समुदाय के लोग गणपति की स्थापना करते आ रहे है. इस बार भी उन्होंने तापी नदी के बीच गणेश प्रतिमा स्थापित किया है. जो आकर्षण का केंद्र बना है. लोग नाव में बैठकर दर्शन करने आते है.

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2007 से हो रही तापी में स्थापना
तापी नदी में तैरते हुए मंडप की प्रतिकृति बनाकर उसमें श्रीजी स्थापित किए गए हैं. लोग सुबह-शाम बप्पा की आरती और पूजा पाठ करने के लिए नावों में सवार होकर जा रहे हैं. अनंत चौदस के दिन बप्पा की मूर्ति को तापी नदी से निकालकर घर के प्रांगण में विसर्जित किया जाएगा. सूरत के रांदेर इलाके के पंच पिपड़ा मोहल्ला के वाशिंदों ने मिलकर तापी में भगवान गणेश की स्थापना की है. लोगों की मान्यता है कि वर्ष 2006 में तापी नदी में आई बाढ़ से सूरत शहर तबाह हो गया था. सूरत के लोगों को तापी की बाढ़ से बचाने के लिए पंच पिपड़ा मोहल्ला के श्री गणेश मंडल द्वारा वर्ष 2007 से तापी नदी में श्रीजी की स्थापना करने की शुरुआत की थी. हालांकि कोरोना के दो वर्षों के दौरान ऐसा नहीं हो सका था, उसके बाद मंडल के युवाओं द्वारा इस परंपरा को फिर से आगे बढ़ाया गया था.

नदी के बीच होती है बप्पा की पूजा
पिछले वर्ष तापी नदी में नाव में मंडप बनाकर भगवान गणेश की स्थापना की थी. इसलिए इस बार फाइबर शीट पर दीपक के आकार का मंडप बनाया गया है. इस मंडप में बप्पा को स्थापित किया गया है. मंडल के सभी सदस्य सुबह-शाम नाव में तापी नदी के बीचों-बीच जाकर बप्पा की पूजा करते हैं. आगामी दस दिनों तक आरती, धुन, प्रसाद और कथा भी की जाती है. मंडल के सदस्यों की इस अनूठी भक्ति से हर कोई हैरान है. 10 दिनों की पूजा के बाद शहर की सभी छोटी-बड़ी मूर्तियां श्रीजी को विदाई देने के लिए तापी तट या समुद्र की ओर चली जाती हैं, लेकिन यह गणेश मंडल बप्पा की मूर्ति को तापी नदी से निकालकर घर के प्रांगण में बड़ी धूमधाम से विसर्जित करता है.

-संजय सिंह राठौड़ की रिपोर्ट