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Hanuman Bahuk: क्या है हनुमान बाहुक, कैसे इसका पाठ करने से दूर हो जाती हैं गंभीर बीमारियां? यहां जानिए इसकी महिमा

Hanuman Bahuk Path: हनुमान बाहुक तुलसीदास जी के द्वारा लिखी गई एक स्तुति है, जिसे उन्होंने कलयुग के प्रकोप से होने वाली शारीरिक पीड़ा को शांत करने के लिए रचा था. यदि स्वास्थ्य की समस्या का कारण समझ में नहीं आ रहा हो, विशेषकर राहु की दशा में, तो हनुमान बाहुक का पाठ अचूक सिद्ध होता है. 

Hanuman Ji  Hanuman Ji 

हनुमान जी को भगवान शिव का अवतार माना जाता है. हनुमान जी को अष्ट चिरंजीवियों में स्थान प्राप्त हैं, इसका अर्थ यह है कि कलयुग में भी वे जीवित हैं, लेकिन कहां हैं यह कोई नहीं जानता. हनुमान जी पूजा करने से भक्त के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. यदि किसी को गंभीर बीमारियों से छुटकारा पाना है तो उसे हनुमान बाहुक का पाठ करना चाहिए. ज्योतिषी शैलेंद्र पांडेय ने बताया कि हनुमान बाहुक तुलसीदास जी के द्वारा लिखी गई एक स्तुति है, जिसे उन्होंने कलयुग के प्रकोप से होने वाली शारीरिक पीड़ा को शांत करने के लिए रचा था. 

तुलसीदास जी को एक गंभीर बीमारी ने जकड़ लिया था, तब उन्होंने पवनपुत्र हनुमान के निमित्त हनुमान बाहुक पाठ की रचना की थी. इस पाठ को बेहद प्रभावकारी माना गया है. यदि स्वास्थ्य की समस्या का कारण समझ में नहीं आ रहा हो, विशेषकर राहु की दशा में, तो हनुमान बाहुक का पाठ अचूक सिद्ध होता है. जिस व्यक्ति को कोई शारीरिक पीड़ा या कोई दर्द रहता है तो उन्हें अवश्य ही हनुमान बाहुक का पाठ करना चाहिए. हनुमान बाहुक के 44 चरणों का पाठ करने वाले इंसान के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं.

स्वास्थ्य की समस्याओं से निजात दिलाने में हनुमान जी की उपासना कैसे है लाभकारी 
1. हनुमान जी भक्ति और शक्ति के अद्भुत प्रतीक हैं.
2. ये सरल भक्ति और प्रेम से शीघ्र प्रसन्न होते हैं.
3. हनुमान जी ने लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा की थी.
4. हनुमान जी के विशेष मन्त्र और स्तुतियों के पाठ से स्वास्थ्य का लाभ हो सकता है.
5. विशेष तरीके से हनुमान बाहुक का पाठ किया जाय तो हर बीमारी में सुधार हो सकता है. 

कैसे करें हनुमान बाहुक का पाठ
1. हनुमान जी की आशीर्वाद मुद्रा की प्रतिकृति की स्थापना करें.
2. साथ में श्री राम की भी स्थापना जरूर करें.
3. उनके समक्ष घी का दीपक जलाएं, एक पात्र में जल भरकर रखें.
4. पहले श्री राम की स्तुति करें, फिर हनुमान जी का ध्यान करें.
5. अब हनुमान बाहुक का पाठ करें.
6. पाठ के बाद पात्र का थोड़ा सा जल को रोगी को पिला दें.
7. बाकी बचा हुआ जल शरीर के रोगग्रस्त हिस्से पर लगाएं.

शरीर की समस्त पीड़ाओं से मिल जाएगी मुक्ति
यदि स्वास्थ्य की समस्या का कारण पता न चल पा रहा हो तो रोज सायंकाल शिव जी के मंदिर में घी का दीपक जलाएं. ऐसा माना जाता है कि जिन्हें गठिया, वात, सिरदर्द, कंठ रोग, जोड़ों का दर्द आदि तरह के दर्द से परेशान हैं, तो जल का एक पात्र सामने रखकर हनुमान बाहुक का 26 या 21 दिनों तक मुहूर्त देखकर पाठ करें. प्रतिदिन उस जल को पीकर दूसरे दिन दूसरा जल रखें. हनुमानजी की कृपा से शरीर की समस्त पीड़ाओं से आपको मुक्ति मिल जाएगी. इसके साथ ही यदि जीवन में रुके हुए काम हैं या कोई इच्छा पूर्ण नहीं हो रही, तब भी हनुमान बाहुक का पाठ करना लाभदायक सिद्ध होता है.