Holashtak ends with Holika Dahan (File Photo: PTI)
Holashtak ends with Holika Dahan (File Photo: PTI)
Holashtak Me Kya Karein Kya Na Karein: रंगों का त्योहार होली इस साल 4 मार्च को है. होली के दिन अमीर हों या गरीब, सभी लोग एक होकर इस पर्व को मनाते हैं. होली से 8 दिन पहले होलाष्टक शुरू होता है और इसका समापन होलिका दहन के दिन होता है. इस साल होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू हो रहा है, जो 3 मार्च 2026 तक रहेगा.
होलाष्टक के दौरान ब्रह्मांड के ग्रहों का स्वभाव उग्र रहता है. नकारात्मक ऊर्जा का संचार पूरे वातावरण में बढ़ जाता है. ग्रहों की प्रतिकूलता के कारण होलाष्टक के दौरान 16 संस्कारों (जैसे नामकरण, जनेऊ, विवाह आदि) का शुभ फल प्राप्त नहीं होता है. ज्योतिष शास्त्र में होलाष्टक के दौरान शुभ और मांगलिक कार्यों को करने की मनाही होती है. होलिका दहन के बाद शुभ कार्यों की शुरुआत की जा सकती है. आइए जानते हैं होलाष्टक में क्या करें और क्या नहीं?
होलाष्टक में क्यों नहीं करने चाहिए शुभ कार्य
ऐसी धार्मिक मान्यता है कि जो लोग होलाष्टक में कोई भी शुभ कार्य करते हैं, उनके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है. होलाष्टक के दौरान मांगलिक कार्य सफल नहीं होते हैं. होलाष्टक के दौरान बनाए गए मकान सुख नहीं देते हैं. ऐसे में इस दौरान गृह निर्माण भी नहीं करना चाहिए. होलाष्टक के दौरान नया व्यवसाय भी शुरू नहीं करना चाहिए. इस दौरान सोना-चांदी और वाहन नहीं खरीदने चाहिए.
होलाष्टक से जुड़ी कथा
होलाष्टक से जुड़ी एक कथा है. इस कथा के अनुसार हिरण्यकशिपु भगवान विष्णु को अपना शत्रु मानता था. उसके पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे. हिरण्यकशिपु नहीं चाहता था कि उसका पुत्र विष्णु की पूजा करे. उसके बार-बार मना करने और यातनाएं देने के बाद भी प्रहलाद की भक्ति भगवान विष्णु के प्रति कम नहीं होती थी. इसका कारण हिरण्यकशिपु अपने पुत्र को मारना चाहता था.
प्रहलाद को मारने के लिए उसने कई उपाय किए लेकिन सफल नहीं हुआ. इसके बाद हिरण्यकशिपु की बहन होलिका ने अपने भाई से कहा कि वरदान के मुताबिक मैं अग्नि से जल नहीं सकती हूं.मैं प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाती हूं. इससे प्रहलाद जलकर मर जाएगा. होलिका इसके बाद प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में आठ दिन के लिए बैठ गई. होलिका को वरदान होने के कारण वह सात दिनों तक नहीं जली लेकिन आठवें दिन वह अग्नि सहन नहीं कर पाई और जलकर उसमें भस्म हो गई. भक्त प्रहलाद को भगवान विष्णु के आशीर्वाद से कुछ भी नहीं हुआ. होलिका के जलने के बाद अग्नि देव शांत हो गए और भक्त प्रहलद सुरक्षित निकल आए. इन आठ दिनों में भक्त प्रहलाद ने अग्नि का ताप और पीड़ा सही, जिस कारण यह आठ दिन होलाष्टक कहा जाने लगा, इसलिए इन आठ दिनों कोई भी मांगलिक कार्य करना शुभ नहीं माना जाता है. होलाष्टक के विषय में कई धार्मिक मान्यताएं हैं. कहते हैं कि होलाष्टक में ही शिवजी ने कामदेव को भस्म किया था. इस अवधि में हर दिन अलग-अलग ग्रह उग्र रूप में होते हैं. इसलिए होलाष्टक में शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं.
होलाष्टक में न करें ये कार्य
1. विवाह: शादी के बंधन में बंधना.
2. चूड़ाकर्मः मुंडन.
3. गर्भाधानः किसी स्त्री का गर्भ धारण करना.
4. पुंसवनः गर्भ धारण करने के तीन महीने के बाद किया जाने वाला संस्कार.
5. सीमंतोन्नयनः गर्भ के चौथे, छठे व आठवें महीने में होने वाला संस्कार.
6. जातकर्म: बच्चे के स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए शहद और घी चटाना और वैदिक मंत्रों का उच्चारण करना.
7. नामकरणः बच्चे का नाम रखना.
8. निष्क्रमणः यह संस्कार बच्चे के जन्म के चौथे महीने में किया जाता है.
9. अन्नप्राशनः बच्चे के दांत निकलने के समय किया जाने वाला संस्कार.
10. विद्यारंभः शिक्षा की शुरुआत.
11. कर्णवेधः कान को छेदना.
12. यज्ञोपवीतः गुरु के पास ले जाना या जनेऊ संस्कार.
13. वेदारंभः वेदों का ज्ञान देना.
14. केशांतः विद्यारम्भ से पहले बाल मुंडन.
15. समावर्तनः शिक्षा प्राप्ति के बाद व्यक्ति का समाज में लौटना समावर्तन है.
16. अन्त्येष्टिः अग्नि परिग्रह संस्कार.
होलाष्टक के दौरान क्या करें
1. होलाष्टक के दौरान जप और तप करना शुभ माना जाता है.
2. भगवान विष्णु और शिव की पूजा करें.
3. हनुमान चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें.
4. गरीबों को दान करें. भोजन कराएं.
5. पितृ तर्पण कर सकते हैं.
6. ग्रह शांति पूजा कर सकते हैं.