Holika Dahan Rules
Holika Dahan Rules
हिंदू धर्म में होली का पर्व और होलिका दहन का विशेष महत्व है. बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में होलिका दहन किया जाता है. फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन किया जाता है और इसके अगले दिन चैत्र शुक्ल पूर्णिमा पर रंग वाली होली खेली जाती है. इस साल होली 4 मार्च को है. उससे एक दिन पहले 3 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा. होलिका दहन के दिन लोग चौक-चौराहों पर लकड़ियां, गोबर का गोएठा आदि को एकत्र कर उसका दहन करते हैं. होलिका दहन को कुछ लोगों को देखने के मनाही होती है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि होलिका की अग्नि जलते समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह तीव्र होता है, जो कुछ लोगों पर बुरा प्रभाव डाल सकता है.
1. नवविवाहित स्त्रियों को नहीं देखना चाहिए होलिका दहन
हिंदू धर्म शास्त्रों के मुताबिक नवविवाहित स्त्रियों को होलिका दहन नहीं देखना चाहिए. कई जगहों पर होलिका दहन से पहले नई दुल्हन को मायके भेज दिया जाता है. पौराणिक कथा के मुताबिक होलिका का विवाह इलोजी से होना था लेकिन विवाह से पहले ही होलिका अपने भाई हिरण्यकश्यप के कहने पर उसके पुत्र प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठ गई और भस्म हो गई. ऐसा कहते हैं कि जब इलोजी की मां बारात लेकर पहुंची और उसने अपनी होने वाली बहु की चिता देखी तो दुख सहन न कर सकी और प्राण त्याग दिए. इसकी के चलते नई दुल्हन होली से पहले ही अपने ससुराल से मायके चली जाती है. होलिका दहन देखना नई दुल्हन के वैवाहिक जीवन के लिए शुभ नहीं माना जाता.
2. गर्भवती महिलाएं भी रहें दूर
गर्भवती महिला को होलिका दहन की अग्नि और उसके धुएं से दूर रहने की सख्त सलाह दी जाती है. इनके लिए होलिका की परिक्रमा करना भी शुभ नहीं माना जाता है. इसका एक वैज्ञानिक कारण यह भी बताया जाता है कि अग्नि का तेज ताप और धुआं उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है. माना जाता है कि होलिका की अग्नि की उग्रता गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है.
3. छोटे बच्चों और नवजात शिशु कभी न जाएं पास
छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं को भी होलिका दहन स्थल पर नहीं ले जाना चाहिए. बच्चों का मन बहुत कोमल और उनकी ऊर्जा बहुत कोमल होती है, जिससे उन पर नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव जल्दी होने की आशंका रहती है. ऐसे में बच्चों को ऐसी जगहों से दूर रखा जाता है.
4. बुजुर्ग और बीमार व्यक्ति को हो सकती है परेशानी
बुजुर्ग और बीमार व्यक्ति को भी होलिका दहन की अग्नि के पास नहीं जाना चाहिए. इस समय वातावरण में मौजूद धुआं और तेज गर्मी बीमार व्यक्ति की शारीरिक तकलीफों को बढ़ा सकती है. जिन लोगों के मन में बहुत अधिक नकारात्मक विचार आते हैं या जो मानसिक रूप से कमजोर महसूस कर रहे हैं, उन्हें भी इस होलिका दहन से बचना चाहिए.
5. सास-बहु के रिश्तों में आ सकती है दूरी
सास और बहु को एक साथ खड़े होकर होलिका दहन नहीं देखना चाहिए. ऐसी मान्यता है एक साथ होलिका दहन देखने से सास-बहु के रिश्तों में दूरी आ जाती है. दोनों के संबंध कभी अच्छे नहीं रहते हैं. घर में क्लेश बढ़ जाता है.
6. इकलौती संतान की मां रहें दूर
ऐसी लोक मान्यता है कि जिन लोगों की इकलौती संतान होती है, उन्हें भी होलिका दहन नहीं देखना चाहिए. पौराणिक कथा के मुताबिक भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद अपने पिता हिरण्यकश्प की इकलौती संतान ही थे.