Murli Manohar Temple
Murli Manohar Temple
भगवान श्रीकृष्ण का नाम आते ही आमतौर पर राधा रानी की छवि सामने आती है. देश के अधिकांश कृष्ण मंदिरों में भगवान के साथ राधा रानी के दर्शन होते हैं, लेकिन झांसी के बड़े बाजार में स्थित मुरली मनोहर मंदिर अपनी अनोखी परंपरा और ऐतिहासिक मान्यताओं के कारण देशभर में अलग पहचान रखता है. यहां भगवान श्रीकृष्ण के साथ केवल राधा रानी ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी रुक्मिणी भी एक साथ विराजमान हैं. मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण बीच में और उनके दोनों ओर राधा रानी तथा रुक्मिणी के दर्शन होते हैं. यही विशेषता इस मंदिर को श्रद्धालुओं के बीच बेहद खास बनाती है.
करीब 1785 में स्थापित इस मंदिर को झांसी के राजपरिवार से जोड़कर देखा जाता है. मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार इसका निर्माण झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की सास और राजा गंगाधर राव की मां सक्कूबाई की देखरेख में कराया गया था. मंदिर को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच कई ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताएं आज भी प्रचलित हैं. कहा जाता है कि रानी लक्ष्मीबाई भी यहां पूजा-अर्चना के लिए आती थीं. मंदिर से महल तक एक सुरंग होने की बात भी कही जाती है, हालांकि अब यह सुरंग बंद हो चुकी है.
राधा-रुक्मिणी के साथ कृष्ण की अनोखी प्रतिमा
मुरली मनोहर मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा है. भगवान के साथ एक ओर राधा रानी और दूसरी ओर उनकी पत्नी रुक्मिणी विराजमान हैं. मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार प्रतिमा की स्थापना के समय उत्तर और दक्षिण भारत की धार्मिक परंपराओं को ध्यान में रखा गया था. उत्तर भारत में राधा-कृष्ण की भक्ति की विशेष परंपरा रही है, जबकि दक्षिण भारत में रुक्मिणी-कृष्ण की आराधना का प्रभाव अधिक देखने को मिलता है. इसी भाव को ध्यान में रखकर यहां दोनों स्वरूपों को एक साथ स्थान दिए जाने की मान्यता है.
मंदिर के पुजारी पंडित वसंत विष्णु गोलवलकर बताते हैं कि पूरे भारत में ऐसा स्वरूप बहुत दुर्लभ है, जहां भगवान श्रीकृष्ण के साथ राधा रानी और रुक्मिणी दोनों एक साथ विराजमान हों. उनका कहना है कि मंदिर में सच्चे मन से आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर भगवान के दरबार में पहुंचते हैं और भक्तों की गहरी आस्था है कि उनकी मुराद पूरी होती है.
रानी लक्ष्मीबाई से जुड़ी हैं कई मान्यताएं
मंदिर का संबंध झांसी के राजपरिवार से होने के कारण इसका ऐतिहासिक महत्व भी बढ़ जाता है. मान्यता है कि रानी लक्ष्मीबाई की सास सक्कूबाई ने इस मंदिर का निर्माण कराया था. राजपरिवार की आस्था का यह प्रमुख केंद्र रहा. स्थानीय परंपरा के अनुसार रानी लक्ष्मीबाई भी यहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए आती थीं. यह भी कहा जाता है कि झांसी पर अंग्रेजों के हमले के दौरान रानी लक्ष्मीबाई के पिता मोरोपंत तांबे मंदिर के ऊपरी हिस्से में रहे थे. मंदिर से जुड़ी ये कथाएं आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय हैं और श्रद्धालुओं को इसके इतिहास से जोड़ती हैं.
जन्माष्टमी पर सजता है कृष्ण का दरबार
हर वर्ष जन्माष्टमी के अवसर पर मुरली मनोहर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन होते हैं. मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण, राधा रानी और रुक्मिणी के दर्शन करने पहुंचते हैं. झांसी ही नहीं, बल्कि बुंदेलखंड और दूसरे क्षेत्रों से भी श्रद्धालु इस अनोखे मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं.
पुजारी वसंत विष्णु गोलवलकर की बात
पुजारी वसंत विष्णु गोलवलकर के मुताबिक, यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के साथ राधा रानी और रुक्मिणी के एक साथ विराजमान होने के कारण विशेष है. उनके अनुसार मंदिर का निर्माण रानी लक्ष्मीबाई की सास ने कराया था और यहां आने वाले भक्त सच्चे मन से भगवान से जो मांगते हैं, उनकी मनोकामना पूरी होने का विश्वास रखते हैं. मंदिर से जुड़ी अर्चना साहू के अनुसार बड़े बाजार का मुरली मनोहर मंदिर बेहद पुराना और पुश्तैनी मंदिर है. उनका कहना है कि मंदिर की सबसे बड़ी पहचान यहां भगवान श्रीकृष्ण के साथ राधा रानी और रुक्मिणी का एक साथ विराजमान होना है. जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर में विशेष सजावट की जाती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
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