Kaal Bhairav (Photo/PTI)
Kaal Bhairav (Photo/PTI)
तंत्र साधना में , विशेष रूप से शिव की तंत्र साधना में भैरव का विशेष महत्व है. भैरव वैसे तो शिव जी के ही रौद्र रूप हैं. लेकिन कहीं कहीं पर इनको शिव का पुत्र भी माना जाता है. कहीं कहीं पर ये भी माना जाता है कि जो कोई भी शिव के मार्ग पर चलता है, उसे भैरव कहा जाता है. इनकी उपासना से भय और अवसाद का नाश होता है. व्यक्ति को अदम्य साहस मिल जाता है. शनि और राहु की बाधाओं से मुक्ति के लिए भैरव की पूजा अचूक होती है. इस बार कालाष्टमी या कालभैरव अष्टमी 12 नवंबर को मनाई जा रही है.
क्या हैं भैरव के अलग अलग स्वरुप-
भैरव के तमाम स्वरुप बताये गए हैं. इसमें असितांग भैरव, रूद्र भैरव, बटुक भैरव और काल भैरव आदि शामिल हैं. बटुक भैरव और काल भैरव स्वरुप की पूजा और ध्यान सर्वोत्तम मानी जाती है. बटुक भैरव भगवान का बाल रूप है. इन्हें आनंद भैरव भी कहते हैं. इस सौम्य स्वरूप की आराधना शीघ्र फलदायी होती है. काल भैरव इनका साहसिक युवा रूप है. इनकी आराधना से शत्रु से मुक्ति, संकट, कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में विजय की प्राप्ति होती है. असितांग भैरव और रूद्र भैरव की उपासना अति विशेष है, जो मुक्ति मोक्ष और कुंडलिनी जागरण के दौरान प्रयोग की जाती है.
किस तरह करें आज भगवान भैरव की उपासना ?
संध्याकाल में भैरव जी की पूजा करें. इनके सामने एक बड़े से दीपक में सरसों के तेल का दीपक जलाएं. इसके बाद उरद की बनी हुई या दूध की बनी हुयी वस्तुएँ उन्हें प्रसाद के रूप में अर्पित करें. विशेष कृपा के लिए इन्हें शरबत या सिरका भी अर्पित करें. तामसिक पूजा करने पर भैरव देव को मदिरा भी अर्पित की जाती है. प्रसाद अर्पित करने के बाद भैरव जी के मन्त्रों का जाप करें.
भगवान भैरव की पूजा की सावधानियां क्या हैं ?
गृहस्थ लोगों को भगवान भैरव की तामसिक पूजा नहीं करनी चाहिए. सामान्यतः बटुक भैरव की ही पूजा करें, यह सौम्य पूजा है. काल भैरव की पूजा कभी भी किसी के नाश के लिए न करें. साथ ही काल भैरव की पूजा बिना किसी योग्य गुरु के संरक्षण के न करें.
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