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Masaan Holi Date 2026: काशी में कब खेली जाएगी मसान की होली? जानें क्यों चिता भस्म से खेलते हैं शिवभक्त...

What Is Masan Ki Holi: मसान की होली की उत्पत्ति पवित्र कथाओं से जुड़ी है. ऐसा माना जाता है कि रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव देवी गौरी को अपने दिव्य मिलन के बाद काशी लेकर आए थे. काशीवासियों ने गुलाल और अबीर से होली खेलकर उनका स्वागत किया था.

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Masan Ki Holi 2026: मसान की होली केवल काशी में ही नहीं पूरे देश-दुनिया में फेमस है. यह होली काशी के पवित्र मणिकर्णिका घाट में मनाई जाती है. मसान की होली की होली का मतलब है चिताओं की राख से होली खेलना. जो एक सदियों पुरानी रस्म का हिस्सा है जिसे 'मसान की होली' के नाम से जाना जाता है. ये होली इतनी फेमस है कि इसे खेलने के लिए लोग दूर-दूर से काशी पहुंचते हैं. कहा जाता है कि मसान की होती बड़े किस्मत वालों को खेलने को मिलती है. ऐसे में चलिए आपको बताते हैं कि आखिर इस बार काशी में मसान की होली कब खेली जाएगी.

क्यों मनाई जाती है मसान की होली
मसान की होली की उत्पत्ति पवित्र कथाओं से जुड़ी है. ऐसा माना जाता है कि रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव देवी गौरी को अपने दिव्य मिलन के बाद काशी लेकर आए थे. काशीवासियों ने गुलाल और अबीर से होली खेलकर उनका स्वागत किया था. हालांकि, पौराणिक कथाओं के अनुसार, उस दिन शिव आत्माओं, गणों और रहस्यमय प्राणियों के साथ होली नहीं मना सके. अगले दिन, वे रंगों के बजाय पवित्र राख का उपयोग करते हुए उनके साथ होली मनाने के लिए श्मशान घाट लौट आए.

कब खेली जाएगी मसान की होली
इस साल मसान की होली 28 फरवरी 2026 को प्रतिष्ठित मणिकर्णिका घाट पर किया जाएगा. यह अनुष्ठान हर साल हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव देवी गौरी को विधिपूर्वक काशी लाते हैं. इसके अगले दिन, महाश्मशान भारत के सबसे गहन और प्रतीकात्मक होली अनुष्ठानों में से एक का केंद्र बिंदु बन जाता है.

इस दिन महाश्मशान घाट पर करीब डेढ़ क्विंटल से अधिक भस्म से होली खेली जाएगी. इस होली के अनोखे रंग को देखने के लिए देशभर से लोग आते हैं. इस दिन मणिकर्णिका घाट पर करीब 20 हजार लोग इकट्ठा होतें है. उत्सव के दौरान डेढ़ क्विंटल से अधिक पवित्र राख का उपयोग किया जाता है. जिसे गुलाल के साथ मिलाकर खेला जाता है.

27 फरवरी को खेली जाएगी हरिश्चंद्र घाट पर होली
मणिकर्णिका घाट के अलावा हरिश्चंद्र घाट पर भी चिता भस्म की होली होती है. इस होली से पहले शिव बारात निकलती है, जो अघोर पीठ बाबा कीनाराम से चलकर हरिश्चंद्र घाट पहुंचती है. पूरे बारात के दौरान भस्म और गुलाल उड़ते है. इस बार 27 फरवरी को हरिश्चंद्र घाट पर यह नजारा देखने को मिलेगा.

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