नीलम अंगूठी
नीलम अंगूठी
ज्योतिष शास्त्र में कई रत्नों को ग्रहों से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता है कि सही रत्न धारण करने से संबंधित ग्रह के शुभ प्रभाव बढ़ सकते हैं. इन्हीं रत्नों में नीलम को बेहद शक्तिशाली माना जाता है. नीलम का संबंध शनि ग्रह से बताया गया है और इसे शनि दोष से राहत पाने के लिए पहना जाता है. हालांकि, ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार नीलम हर व्यक्ति के लिए शुभ नहीं होता. इसलिए इसे पहनने से पहले कुंडली की जांच और योग्य ज्योतिषी की सलाह लेना जरूरी माना जाता है.
किस उंगली में पहनना चाहिए नीलम
ज्योतिष के अनुसार नीलम की अंगूठी दाहिने हाथ की मध्यमा उंगली में पहनना शुभ माना जाता है. अगर कोई व्यक्ति बाएं हाथ से मुख्य काम करता है, तो मुख्य हाथ की मध्यमा उंगली में इसे पहनने की सलाह दी जाती है. मध्यमा उंगली का संबंध शनि ग्रह से माना गया है.
नीलम पहनने का सही दिन और समय
नीलम को शनिवार के दिन धारण करना शुभ माना जाता है. इसे सुबह 5 बजे से 7 बजे के बीच या सूर्यास्त के बाद पहनने की मान्यता है. अंगूठी पहनने से पहले इसे गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध करने की परंपरा भी बताई गई है.
किस धातु में पहनें नीलम
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार नीलम को चांदी, पंचधातु या प्लैटिनम में जड़वाकर पहना जा सकता है. वहीं, इसे पीले सोने में पहनने से बचने की सलाह दी जाती है. इसकी वजह सूर्य और शनि के बीच शत्रुता की ज्योतिषीय मान्यता को बताया जाता है.
नीलम पहनने के क्या फायदे माने जाते हैं
मान्यता है कि सही व्यक्ति को नीलम पहनने से धन, पद और मान-सम्मान में वृद्धि हो सकती है. इसे नौकरी, व्यापार, न्याय, वकालत और राजनीति से जुड़े लोगों के लिए भी लाभकारी माना जाता है. ज्योतिषीय मान्यताओं में नीलम को मानसिक तनाव कम करने, एकाग्रता बढ़ाने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला भी बताया गया है.
किन राशियों के लिए शुभ है नीलम
मकर और कुंभ राशि के जातकों के लिए नीलम को विशेष रूप से शुभ माना जाता है, क्योंकि इन राशियों के स्वामी शनि हैं. इसके अलावा वृषभ और तुला राशि के जातकों के लिए भी इसे लाभकारी माना जाता है. वहीं, मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन राशि के लोगों को आमतौर पर नीलम पहनने से बचने की सलाह दी जाती है.
कैसे पता करें नीलम आपको सूट करता है या नहीं
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार नीलम को पहले कुछ समय कपड़े में बांधकर बाजू पर रखने या तकिए के नीचे रखकर देखने की परंपरा है. इस दौरान बेचैनी, बुरे सपने या तनाव जैसे संकेत न दिखें तो इसे अनुकूल माना जाता है. अगर नीलम पहनने के 24 से 72 घंटे के भीतर गुस्सा, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द, आंखों में परेशानी, बुरे सपने या मानसिक तनाव जैसे लक्षण महसूस हों, तो ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार रत्न तुरंत उतार देना चाहिए और विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए.
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