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Puja ke Niyam: क्यों जलाते हैं पूजा में धूप या अगरबत्ती? जानें देवी-देवताओं को फल और भोग अर्पित करने का भी महत्व

सनातन धर्म में पूजा-पाठ का विशेष महत्व है. हिंदू धर्म में पूजा के दौरान धूप या अगरबत्ती जलाया जाता है. देवी-देवताओं को फल और भोग अर्पित किए जाते हैं. आइए जानते हैं पूजा में इनका महत्व क्या है?

Puja ke Niyam Puja ke Niyam

सनातन धर्म में पूजा-पाठ का विशेष महत्व है. हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान धूप या अगरबत्ती जलाया जाता है. व्यक्ति के मन को एकाग्र करने और तनाव घटाने के लिए सुगंध का प्रयोग किया जाता है. सुगंध से व्यक्ति अपनी मन की अलग-अलग चिंताओं को तुरंत दूर कर सकता है, इसीलिए पूजा के दौरान अगरबत्ती या धूपबत्ती का प्रयोग किया जाता है. अगरबत्ती की तुलना में धूपबत्ती का प्रयोग ज्यादा अच्छा माना जाता है. धूप बत्ती या तो पूजा के पूर्व जलाएं या पूजा के उपरान्त. मानसिक एकाग्रता के लिए चंदन की धूपबत्ती का प्रयोग करें. आर्थिक लाभ के लिए और मान सम्मान के लिए गुलाब की धूपबत्ती का प्रयोग करें. तनाव कम करने के लिए गुग्गल की धूप का प्रयोग करें. ग्रहों के बुरे प्रभाव को दूर करने के लिए लोबान की धूपबत्ती जलाएं. 

पूजा में दीपक के प्रयोग का महत्व और लाभ 
हम ईश्वर को प्रकाश के रूप में मानते हैं. अतः दीपक जलाकर उसकी ज्योति के रूप में ईश्वर को स्थापित करते हैं. दीपक से एकाग्रता और ऊर्जा दोनों प्राप्त होती है. अलग-अलग मुखी दीपक जलाकर अलग-अलग तरह की मनोकामनाएं पूरी की जा सकती हैं. ईश्वर की कृपा के लिए एक मुखी दीपक जलाएं. कर्ज मुक्ति के लिए नौ मुखी दीपक जलाएं. स्वस्थ्य और आयु रक्षा के लिए दो मुखी दीपक शुभ होगा. विरोधियों और शत्रुओं को शांत करने के लिए तीन मुखी दीपक जलाएं. नौकरी , रोजगार और करियर के लिए हर शनिवार को पीपल के नीचे चार मुखी दीपक जलाएं.

क्या भोग अर्पित करना है आवश्यक 
ईश्वर की कृपा को अपने अंदर लाने के लिए भोग लगाया और ग्रहण किया जाता है. भोग के बिना भी पूजा हो सकती है लेकिन भोग हो तो ज्यादा अच्छा होगा. भोग में कोई भी सात्विक चीज, फल, मिठाई यहां तक जल भी चढ़ाया जा सकता है. कुछ न हो तो शक्कर चढ़ाना उत्तम होता है. सफेद भोग अर्पित करने से आर्थिक और मानसिक स्थिरता आती है. बूंदी के लड्डू अर्पित करने से समस्त ग्रहों की बाधा शांत होती है. इमरती का भोग दुर्घटनाओं और आकस्मिक घटनाओं से रक्षा करता है. पंचामृत अर्पित करने से आयु लम्बी होती है. पापों का प्रायश्चित होता है. केवल जल अर्पित करने से शिक्षा, संतान और ईश्वर की कृपा मिलती है. 

पूजा में फूल अर्पित करना कितना जरूरी 
ईश्वर को फूल चढ़ाकर हम अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं. स्वयं भी फूलों का प्रयोग करके हम अपने मन को बेहतर करने का प्रयत्न करते हैं. अलग-अलग रंग और सुगंध के फूल अलग-अलग तरह की भावनाएं दर्शाते हैं. ये फूल मानसिक भी हो सकते हैं और वास्तविक भी. इन्हें अपने इष्ट देव को अर्पित करना चाहिए. शिक्षा और प्रतियोगिता में सफलता के लिए सफेद फूल अर्पित करना सर्वोत्तम होगा और उसमें सुगंध जितनी कम हो उतना ही अच्छा है. नौकरी के लिए सुर्ख लाल या नीले रंग का फूल भगवान को अर्पित करें. प्रेम में सफलता के लिए गुलाबी और सफेद दोनों फूल अर्पित करें. इसकी सुगंध थोड़ी तेज हो तो ज्यादा लाभदायक होगा. शीघ्र विवाह के लिए पीले फूलों की माला या ढेर सारे पीले फूल अर्पित करें. धन संपत्ति की प्राप्ति के लिए गुलाबी गुलाब अर्पित करें . 

क्या बिना धूप-दीप, फूल और भोग प्रसाद के बिना पूजा नहीं होती 
वाह्य पूजा में इन सब वस्तुओं की आवश्यकता होती है लेकिन इनके अभाव में मानस पूजा भी की जा सकती है. मानस पूजा, वाह्य पूजा से ज्यादा श्रेष्ठ मानी जाती है.