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Durga Puja Themes in Purulia: पर्यावरण संरक्षण से लेकर 100 साल पुरानी परंपरा तक, पुरुलिया के इन 6 पंडालों की थीम जीत लेगी दिल

आज महाषष्ठी है. मां दुर्गा के बोधन और उनके आगमन के साथ पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में भी दुर्गोत्सव का उत्साह छाने लगा है. पूजा पंडाल सजकर तैयार हैं और पूजा कमेटियां मां के स्वागत की अंतिम तैयारियों में जुटी हैं. नदिहा बारोवारी के पंडाल पर्यावरण संरक्षण और प्राचीन संस्कृति जैसी खास थीम से सजा है, जो अपने 100वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है.

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पुरुलिया के अनोखे पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते दुर्गा पंडाल पुरुलिया के अनोखे पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते दुर्गा पंडाल

देश के कई हिस्सों में मां दुर्गा की पूजा नवरात्रि के रूप में मनाई जाती है, लेकिन बंगाल में दुर्गापूजा का भाव बेहद खास है. यहां मां दुर्गा को घर की बेटी माना जाता है. जिस तरह एक बेटी अपने मायके लौटती है, उसी तरह मां दुर्गा भी महाषष्ठी से दशमी तक अपने मायके यानी भक्तों के घर आती हैं. बंगाल की इस परंपरा में मां का आगमन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि बेटी के घर लौटने की खुशी, अपनापन और भावनाओं से जुड़ा उत्सव है.

महाषष्ठी के साथ पुरुलिया में मां दुर्गा के स्वागत का उत्साह बढ़ गया है. अगले पांच दिनों तक मां को घर की बेटी मानकर उनकी आराधना, स्वागत और विदाई की बंगाली परंपरा भक्ति और भावनाओं के रंग में रंगी नजर आएगी. पर्यावरण संरक्षण के संदेश से लेकर पत्थरों के बीच प्राचीन मंदिर संस्कृति और ऐतिहासिक पूजा परंपरा तक, इस बार पुरुलिया के दुर्गोत्सव में कई रंग देखने को मिलेंगे.

पुरुलिया के 6 प्रमुख दुर्गापूजा पंडालों की खास थीम
महाषष्ठी पर मां के स्वागत की तैयारियों के बीच पुरुलिया के अलग-अलग पंडालों में विविध विषयों को जगह दी गई है. कहीं पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है, तो कहीं प्राचीन मंदिरों की स्थापत्य कला और धार्मिक संस्कृति को दर्शाया गया है. जिले के छह प्रमुख पंडाल इस बार खास आकर्षण का केंद्र हैं.

1. चकबाजार षोलआना और शक्ति संघ- पर्यावरण संरक्षण का संदेश
चकबाजार षोलआना और शक्ति संघ के पूजा पंडालों में पेड़, जंगल और पहाड़ों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया है. लोगों से अपील की जा रही है कि इस दुर्गापूजा पर मां दुर्गा के नाम पर कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं.

2. भामुरिया बाथानेश्वर- 'पाषाणे प्राण' की थीम
भामुरिया बाथानेश्वर दुर्गापूजा कमेटी ने इस बार 'पाषाणे प्राण' थीम रखी है. यहां पहाड़ों और पत्थरों के बीच गुफा मंदिर की शैली में प्राचीन मंदिर संस्कृति को प्रस्तुत किया गया है. पत्थरों की कलात्मक सजावट और मंदिर की बनावट इस पंडाल की खास पहचान है.

3. नितुरिया दुब्बेश्वरी- वृंदावन के चंद्रोदय मंदिर की झलक
नितुरिया दुब्बेश्वरी दुर्गापूजा कमेटी का पंडाल वृंदावन के चंद्रोदय मंदिर की तर्ज पर तैयार किया गया है. इसके माध्यम से मंदिर की स्थापत्य शैली को पंडाल में उतारने की कोशिश की गई है.

4. गाड़िखाना सार्वजनिक श्रीश्री दुर्गा मंदिर- मां के स्वागत की तैयारी
गाड़िखाना सार्वजनिक श्रीश्री दुर्गा मंदिर में भी दुर्गोत्सव को लेकर तैयारियां की गई हैं. महाषष्ठी के अवसर पर मां दुर्गा की आराधना और स्वागत के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह है.

5. अमलापाड़ा दुर्गापूजा कमेटी- पूजा की तैयारियां पूरी
अमलापाड़ा दुर्गापूजा कमेटी की ओर से भी मां दुर्गा की पूजा की तैयारियां की गई हैं. महाषष्ठी के साथ ही यहां उत्सव का माहौल बनने लगा है और श्रद्धालु मां के दर्शन का इंतजार कर रहे हैं.

6. नदिहा बारोवारी- 100वें वर्ष में पहुंची पूजा
नदिहा बारोवारी दुर्गापूजा कमेटी के लिए यह साल खास है. इस बार उसकी पूजा 100वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है. लंबे समय से चली आ रही इस पूजा परंपरा के बीच महाषष्ठी पर मां के स्वागत की तैयारियां की गई हैं.
 

(रिपोर्ट- सत्यजीत बेनर्जी)

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