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Raisen News: काली मिट्टी और दूर्वा से बनाई मां वनदेवी की प्रतिमा, पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही यह मूर्ति बनी आकर्षण का केंद्र 

नवरात्रि में भक्त मां दुर्गा की भक्ति भाव से आराधना करते हैं. रायसेन में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए 10 वर्षों से इको फ्रेंडली प्रतिमा की स्थापना कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है. यहां त्रिकूट पर्वत की थीम पर पंडाल सजा है. भक्त गुफा से होकर मां के दर्शन कर रहे हैं. यहां काली मिट्टी और दूर्वा से बनी मां दुर्गा की वन देवी मूर्ति पर्यावरण संरक्षण के संदेश दे रही है.मां की यह अनोखी मूर्ति आकर्षण का केंद्र बनी है. 

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Maa Vandevi Maa Vandevi

रायसेन शहर के सागर रोड स्थित रॉयल सिटी कॉलोनी में इस बार भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती मां दुर्गा (वनदेवी) की अनोखी प्रतिमा आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. कॉलोनीवासियों ने काली मिट्टी और दूर्वा (हरी घास) का उपयोग कर मां की प्रतिमा तैयार कर स्थापित की है. बड़ी बात यह है कि यह प्रतिमा निर्माण में किसी भी केमिकल युक्त सामग्री का उपयोग नहीं किया गया है. 

कॉलोनी की बेटियों और महिलाओं ने बनाई है यह प्रतिमा
जिले के रॉयल सिटी परिवार की ओर से लगातार इकोफ्रेंडली मूर्ति बनाई जा रही है, चाहे गणेश प्रतिमा हो या देवी जी की. दसवें वर्ष भी इको फ्रेंडली प्रतिमा स्थापित कर लोगों को प्रकृति संरक्षण और नदियों को स्वच्छ रखने का संदेश दिया जा रहा है. समिति के रॉयल सिटी में काली मिट्टी और दूर्वा से बनाई मां वनदेवी की प्रतिमा, पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है. समिति के संरक्षक रघुवीर सिंह भदौरिया ने बताया कि समिति के अध्यक्ष रिंकू शर्मा के मार्गदर्शन में कॉलोनी की बेटियों और मातृशक्ति ने करीब 8 से 10 दिनों में घर पर ही मां वनदेवी की प्रतिमा तैयार की है.

प्रतिमा निर्माण में इतने रुपए हुए हैं खर्च 
 प्रतिमा निर्माण में लगभग 15 हजार रुपए खर्च हुए हैं. हर साल नई थीम पर प्राकृतिक सामग्री से प्रतिमा बनाने का उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है. इससे पहले भी कॉलोनी में लौंग-इलायची, सुपारी और अन्य प्राकृतिक सामग्री से प्रतिमाएं तैयार की जा चुकी हैं. मां के दरबार को तैयार करने और सजाने में कॉलोनीवासियों का विशेष सहयोग रहता है. समिति द्वारा हर साल पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर अलग-अलग प्रयोग किए जाते हैं. 

मिल चुके हैं कई पुरस्कार
इको फ्रेंडली झांकी और जागरूकता के प्रयासों के लिए रॉयल सिटी दुर्गा उत्सव समिति को हिंदू उत्सव समिति सहित अन्य सामाजिक संगठनों से पुरस्कार भी मिल चुके हैं. इस बार भी प्राकृतिक सामग्री से तैयार मां वनदेवी की प्रतिमा के माध्यम से लोगों को प्रकृति सहेजने, स्वच्छता अपनाने और जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने का संदेश दिया जा रहा है. हर साल नई थीम पर प्राकृतिक सामग्री से प्रतिमा बनाने का उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है. 

मनमोहक पूजा पंडाल
इससे पहले भी कॉलोनी में लौंग-इलायची, सुपारी और अन्य प्राकृतिक सामग्री से प्रतिमाएं तैयार की जा चुकी हैं. त्रिकूट पर्वत की थीम पर सजाया पंडाल इस वर्ष पंडाल को त्रिकूट पर्वत का स्वरूप दिया गया है. मां वनदेवी का गर्भगृह प्राकृतिक लताओं, पत्तियों और बेलों से सजाया गया है. श्रद्धालु गुफा में प्रवेश करते ही भगवान गणेश के दर्शन करते हैं. इसके बाद भगवान भोलेनाथ के पूरे परिवार, मां वनदेवी, माता वैष्णो देवी और भैरवनाथ के दर्शन करते हुए बाहर निकलते हैं. गुफा और हरियाली से सजे पंडाल में प्राकृतिक वातावरण का अनुभव श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है. मां के दर्शन के लिए इन दिनों भक्तों की लंबी कतारें भी लग रही हैं.