Lord Ram
Lord Ram
राम रक्षा स्रोत को भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम माना जाता है. इस स्रोत का नियमित पाठ करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और हर प्रकार की विपत्ति से रक्षा होती है. ज्योतिषियों के अनुसार राम नाम के उच्चारण से शरीर और मन में आत्मिक शांति प्राप्त होती है.
राम रक्षा स्रोत के चमत्कारी लाभ
राम रक्षा स्रोत का पाठ करने से व्यक्ति भयमुक्त रहता है और शारीरिक कष्टों से छुटकारा मिलता है. मंगलवार के दिन इसका पाठ करने से मंगल ग्रह के दोष समाप्त होते हैं. मान्यता है कि राम रक्षा स्रोत का पाठ करने से हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इसके प्रभाव से व्यक्ति के चारों ओर सुरक्षा कवच बनता है, जिससे हर प्रकार की विपत्ति से रक्षा होती है.
राम रक्षा स्रोत के ज्योतिषीय उपाय
राम रक्षा स्रोत के पाठ के दौरान कुछ विशेष उपाय करने से इसके लाभ कई गुना बढ़ जाते हैं. जैसे, सरसों के दाने को गोल-गोल घुमाने से आर्थिक समस्याओं का समाधान होता है. गंगाजल का छिड़काव करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है. तांबे के बर्तन में पानी भरकर राम रक्षा स्रोत का पाठ करने से यह पानी औषधि के रूप में उपयोग किया जा सकता है.
राम रक्षा स्रोत का पाठ कैसे करें
राम रक्षा स्रोत का पाठ करने से पहले शरीर और मन को शुद्ध करना आवश्यक है. इसे प्रतिदिन 11 बार या कम से कम 7 बार नियमित रूप से पढ़ा जाना चाहिए. 41 दिनों तक लगातार पाठ करने से इसका प्रभाव दोगुना हो जाता है. पाठ के दौरान सच्चे मन से भगवान राम का स्मरण करना चाहिए.
राम रक्षा स्रोत का आध्यात्मिक प्रभाव
राम रक्षा स्रोत के उच्चारण से निकली शब्द ध्वनि वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है. यह जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाओं को दूर करने में सहायक है. भगवान राम के नाम में इतनी शक्ति है कि यह व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाता है. राम रक्षा स्रोत का पाठ काल के गाल में समाए व्यक्ति को भी वापस लाने की क्षमता रखता है. इसके नियमित पाठ से न केवल अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा का भी नाश होता है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार 41 दिनों तक निरंतर पाठ करने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
रामटेक धाम का पौराणिक महत्व
महाराष्ट्र के नागपुर जिले में स्थित रामटेक धाम का वर्णन वाल्मीकि रामायण और पद्मपुराण में मिलता है. यह वही स्थान है जहां भगवान राम ने वनवास के दौरान चार महीने बिताए थे. इस धाम में भगवान राम ने रावण के अत्याचारों के खिलाफ संकल्प लिया था. रामटेक की पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर आज भी राम भक्तों के लिए एक पूजनीय स्थल है. रामटेक धाम की स्थापत्य कला अद्भुत है. यह धाम आधुनिक मराठा काल से संबंधित है और यहां भगवान राम के चरण पड़े थे. यह स्थान संस्कृत कवि कालिदास से भी जुड़ा हुआ है, जिन्होंने यहां 'मेघदूत' की रचना की थी. आज यह धाम राम भक्तों के लिए एक पूजनीय स्थल है.