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Navsari Dori Garba: नवसारी में डोरी रास गरबा, 120 सालों से चली आ रही यह अनोखी परंपरा, जानें इसकी खासियत

मां दुर्गा की आराधना का पर्व नवरात्रि इन दिनों पूरे उत्साह के साथ मनाई जा रही है. इस बीच, नवसारी जिले के गणदेवी शहर के कुंभारवाड़ इलाके में हनुमानजी मंदिर के प्रांगण में 120 साल पुरानी परंपरा को जीवंत रखने वाला अनोखा डोरी रास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यहां युवा पारंपरिक अंदाज में डोरी के साथ रास खेलकर अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेज रहे हैं.

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Navsari Traditional Dori Garba: गुजरात सहित देशभर में इन दिनों मां दुर्गा की आराधना के पर्व नवरात्रि की धूम मची हुई है. आधुनिक दौर में जहां लोग एसी डोम और हाई-प्रोफाइल आयोजनों में गरबा खेलने को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं गुजरात के नवसारी जिले के गणदेवी शहर के कुंभारवाड़ इलाके में आज भी एक अनूठी परंपरा पूरे उत्साह के साथ निभाई जा रही है. यहां हनुमानजी मंदिर के प्रांगण में Jen-z युवा पारंपरिक ‘डोरी रास’ प्रस्तुत करते हैं. 

आज भी पहचान है बरकरार
स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह परंपरा पिछले करीब 120 वर्षों से चली आ रही है और आज भी इसकी विशिष्ट पहचान बरकरार है. इस रास की सबसे बड़ी खासियत है, इसमें इस्तेमाल होने वाली डोरी. डोरी के साथ डांडिया बांधकर रास खेलते हैं. 

ऐसे खुलती हैं डोरियां
नृत्य के दौरान डोरियां इस तरह एक-दूसरे में गुंथ जाती हैं, मानो किसी महिला की चोटी गूंथी जा रही हो. रास की लय और ताल के साथ ये डोरियां गुंथती भी हैं और नृत्य के दौरान ही अपने आप खुलती भी जाती हैं. कहा जाता है कि करीब दस पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा गणदेवी की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है. आधुनिकता के इस दौर में भी कुंभारवाड़ के लोगों ने अपनी इस विरासत को सहेजकर रखा है. यही वजह है कि यहां का अनोखा डोरी रास नवरात्रि के उत्सव में परंपरा, आस्था और संस्कृति का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है.

गुजरात का सबसे लोकप्रिय लोक नृत्य 
आपको मालूम हो गरबा गुजरात का सबसे लोकप्रिय लोक नृत्य है. इसे मुख्य रूप से नवरात्रि के नौ दिनों के त्योहार के दिन किया जाता है. गुजरात में नवरात्रि के दौरान गरबा खेलने की परंपरा देवी दुर्गा (शक्ति) की आराधना और उनके प्रति भक्ति का एक प्रमुख सांस्कृतिक और धार्मिक रूप है. आपको मालूम हो कि गुजरात के गरबा की सांस्कृतिक महत्ता को देखते हुए दिसंबर 2023 में इसे यूनेस्को की 'मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया था.

(रौनक जैन की रिपोर्ट)