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Somnath Temple: 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम सोमनाथ, जानें इस मंदिर की खासियत और यहां कैसे पहुंच सकते हैं श्रद्धालु?

Somnath Swabhiman Parv: गुजरात के समुद्र तट पर 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम सोमनाथ धाम स्थित है. इस मंदिर में दर्शन के लिए शिव भक्तों का हर दिन तांता लगा रहता है. आइए इस मंदिर की खासियत और यहां कैसे श्रद्धालु पहुंच सकते हैं, उसके बारे में जानते हैं?

PM Modi at Somnath Temple (Photo: PTI) PM Modi at Somnath Temple (Photo: PTI)

गुजरात के समुद्र तट पर 12 ज्योतिर्लिंगों में से प्रथम सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple) स्थित है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने रविवार को सोमनाथ मंदिर में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व (Somnath Swabhiman Parv) में हिस्सा लिया. पीएम मोदी ने सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक किया और विशेष पूजा-अर्चना की. आपको मालूम हो कि साल 1026 में महमूद गजनवी ने पहली बार सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था, जिसके 1000 साल पूरे हुए हैं, उसी 1000वीं वर्षगांठ के अवसर पर सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 8 से 11 जनवरी 2026 तक आयोजित किया गया. इसके अलावा सोमनाथ मंदिर में 11 मई 1951 को पुनर्निर्माण के बाद प्राण प्रतिष्ठा की गई थी. मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने की वजह से सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की अहमियत और बढ़ गई. 

हिंदुओं का एक लोकप्रिय तीर्थस्थल 
सोमनाथ मंदिर गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगार में स्थित है. सोमनाथ मंदिर आदिकाल से ही त्रिवेणी संगम (तीन नदियों कपिला, हिरण और सरस्वती का संगम) होने की वजह से हिंदुओं का एक लोकप्रिय तीर्थस्थल था. सोमनाथ मंदिर महमूद गजनवी के हमले से पहले किलेनुमा इमारत के अंदर था. यह तीन तरफ से समुद्र से घिरा हुआ था. सोमनाथ मंदिर की छत पिरामिड की तरह थी. मंदिर 13 मंजिल ऊंचा था. मंदिर के गुंबद सोने से बने थे. यह काफी दूर से ही चमकते थे. इस मंदिर में इतना सोना-चांदी था कि उसको लूटने के लिए महमूद गजनवी के हमले के बाद से लेकर मुगलकाल तक इस मंदिर पर करीब 17 हमले हुए लेकिन आज भी यह मंदिर अपने जगह पर कायम है.

हिंदू धर्म ग्रंथों में क्या है सोमनाथ मंदिर का इतिहास
प्राचीन हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार सोमनाथ मंदिर का निर्माण सतयुग में राजा चंद्रदेव सोमराज ने करवाया था. उस समय इस मंदिर को सोने से तैयार किया गया. ऐसी धार्मिक कथा है कि प्रजापति दक्ष के श्राप से मुक्ति पाने के लिए चंद्रदेव ने इसी स्थान पर भगवान शंकर की घोर तपस्या की थी. चंद्रदेव की तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें पुनर्जीवन दिया, इसीलिए इस मंदिर का नाम सोमनाथ पड़ा, जिसका अर्थ है चंद्रमा के स्वामी. ऐसी मान्यता है कि त्रेतायुग में सोमनाथ मंदिर को रावण ने चांदी से बनवाया. द्वापरयुग में भगवान श्रीकृष्ण ने इस मंदिर का पुनर्निर्माण लकड़ी से करवाया. कलियुग में राजा भीमदेव सोलंकी ने सोमनाथ मंदिर को पत्थर की कारीगरी से बनवाया. 

सोमनाथ मंदिर की खासियत 
सोमनाथ मंदिर अपनी वास्तुकला के कारण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. यह मंदिर आधुनिक इंजीनियरिंग व प्राचीन शिल्प का बेजोड़ नमूना है. वर्तमान मंदिर चालुक्य शैली की वास्तुकला में बना है. इसकी नक्काशी गजब की है. सोमनाथ मंदिर को तीन मुख्य हिस्सों गर्भगृह, सभामंडप और नृत्यमंडप में बांटा गया है. सोमनाथ मंदिर के शिखर की ऊंचाई 150 फीट है. सोमनाथ मंदिर के सबसे ऊपरी हिस्से पर 10 टन भारी विशाल कलश स्थापित है. पूरे मंदिर परिसर में 1666 स्वर्ण मंडित कलश स्थापित हैं. सोमनाथ मंदिर की ध्वजा 27 फीट ऊंची है, जो दूर समुद्र से ही दिखाई देती है. सोमनाथ मंदिर में एक अखंड ज्योति जलती रहती है, जिसे शिव के स्थायी स्वरूप का प्रतीक माना जाता है. सोमनाथ मंदिर के दक्षिण दिशा में बाण स्तंभ स्थापित है. मंदिर के पास कपिल मुनि द्वारा स्थापित कपिल कुंड है, जहां स्नान को पवित्र माना जाता है.

सोमनाथ मंदिर में दर्शन करने का समय 
1.
सोमनाथ मंदिर में हर दिन श्रद्धालु सुबह 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक दर्शन कर सकते हैं. 
2. सोमनाथ मंदिर में सुबह की मंगला आरती सुबह 7:00 बजे होती है.
3. सोमनाथ मंदिर में दोपहर की आरती 12:00  बजे और शाम की आरती रात 7:00  बजे होती है. 
4. सोमनाथ मंदिर परिसर में रात में लाइट एंड साउंड शो भी आयोजित किया जाता है. इसमें सोमनाथ के इतिहास और गौरवशाली विरासत को दिखाया जाता है. 

आप कैसे पहुंच सकते हैं सोमनाथ मंदिर 
एक आंकड़े के मुताबिक हर साल लगभग 92 से 97 लाख श्रद्धालु सोमनाथ दर्शन करने के लिए जाते हैं. यदि आप भी सोमनाथ मंदिर जाना चाह रहे हैं तो हम आपको बता रहे हैं कैसे यहां पहुंच सकते है? सोमनाथ मंदिर आप सड़क मार्ग, रेल मार्ग और हवाई मार्ग से जा सकते हैं. अहमदाबाद से सोमनाथ की दूरी 408.5 किलोमीटर, राजकोट से सोमनाथ की दूरी 194.9 किलोमीटर और पोरबंदर से सोमनाथ की दूरी 130.7 किलोमीटर है. यदि आप सड़क मार्ग से सोमनाथ धाम जाना चाह रहे हैं तो गुजरात राज्य परिवहन की बसें और प्राइवेट बसें अहमदाबाद, राजकोट, पोरबंदर, जूनागढ़ जैसे शहरों से सीधे सोमनाथ या वेरावल तक जाती हैं. आप बस से सोमनाथ मंदिर जा सकते हैं किराया भी कम लगेगा. 

सोमनाथ से सबसे पास में दो रेलवे स्टेशन सोमनाथ रेलवे स्टेशन और वेरावल रेलवे स्टेशन हैं. सोमनाथ रेलवे स्टेशन मंदिर से 0.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. सोमनाथ पहुंचने के लिए यह सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन है. वेरावल रेलवे स्टेशन से सोमनाथ मंदिर की दूरी 7 किलोमीटर है. वेरावल रेलवे स्टेशन के लिए अहमदाबाद, मुंबई, राजकोट, द्वारका, जूनागढ़ व अन्य बड़े शहरों से नियमित ट्रेनें चलती हैं. रेलवे स्टेशनों से सोमनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए टैक्सी, कैब, ऑटो और रिक्शा आसानी से मिल जाता है. सोमनाथ मंदिर आप हवाई मार्ग से भी जा सकते हैं. इसमें समय की काफी बचत होती है. सोमनाथ मंदिर के सबसे नजदीक हवाई अड्डा दीव हवाई अड्डा है. इसके अलावा पास के अन्य दो हवाई अड्डे राजकोट हवाई अड्डा और अहमदाबाद हवाई अड्डा हैं. दीव हवाई अड्डा सोमनाथ से 85 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. राजकोट हवाई अड्डा की दूरी सोमनाथ मंदिर से 200 किमी और अहमदाबाद हवाई अड्डे की दूरी 390 किलोमीटर है.