बाबा बागनाथ मंदिर में सुहागिन महिलाओं ने करवा चौथ की परंपरा निभाई
बाबा बागनाथ मंदिर में सुहागिन महिलाओं ने करवा चौथ की परंपरा निभाई
देशभर में करवाचौथ का त्योहार पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है. उत्तराखंड के बागेश्वर में भी इस पर्व का उत्साह देखने को मिला. यहां बाबा बागनाथ मंदिर में सुबह से ही सुहागिन महिलाएं पूजा-अर्चना के लिए पहुंचती रहीं. महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखा.
करवाचौथ के अवसर पर बाबा बागनाथ मंदिर पहुंचीं महिलाओं ने भगवान शिव, माता पार्वती और करवा माता की विधिपूर्वक पूजा की. मंदिर परिसर में व्रती महिलाएं एकत्रित हुईं और करवा माता की पूजा-अर्चना करने के साथ करवाचौथ की कथा भी सुनी. इस दौरान महिलाओं में पर्व को लेकर खास उत्साह नजर आया. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवाचौथ पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के साथ चंद्रदेव की आराधना का भी विशेष महत्व है. इसी परंपरा के तहत महिलाएं दिनभर व्रत रखकर शाम को चंद्रमा के दर्शन करने का इंतजार करती हैं.
चांद को जल अर्पित करने के बाद पूरा होगा व्रत
शाम को चंद्रमा निकलने के बाद महिलाएं उसके दर्शन करती हैं और जल अर्पित करती हैं. इसके साथ ही वे अपने व्रत का संकल्प पूरा करेंगी. मान्यता है कि करवाचौथ पर चंद्रमा के दर्शन और उसे जल अर्पित करने से जीवन में सुख, सौभाग्य और समृद्धि आती है. महिलाओं के लिए चांद के दर्शन इस पर्व का अहम हिस्सा हैं. चंद्रमा की पूजा के बाद वे अपने पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोलेंगी. इसी के साथ दिनभर रखा गया निर्जला व्रत पूरा होगा.
पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं में भी उत्साह
इस बार पहली बार करवाचौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं ने भी अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने बताया कि इस पवित्र पर्व से जुड़ी परंपराओं और आस्था को करीब से महसूस करना उनके लिए सुखद रहा. निर्जला व्रत रखकर बाबा बागनाथ के दरबार में पूजा करना उन्होंने अपने लिए विशेष सौभाग्य बताया. महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन के साथ परिवार में खुशहाली की कामना की. अब सभी को शाम को चंद्रमा के निकलने का इंतजार है, जिसके दर्शन और जल अर्पण के बाद वे अपने पति के हाथ से जल पीकर करवाचौथ का व्रत पूरा करेंगी.
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