Shivling vs Jyotirling
Shivling vs Jyotirling
भगवान शिव की पूजा देश में अलग-अलग रूपों में की जाती है, लेकिन शिवलिंग के रूप में उनकी उपासना सबसे अधिक मानी जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, जहां भगवान शिव स्वयं दिव्य प्रकाश यानी ज्योति के रूप में विराजमान होते हैं, उसे ज्योतिर्लिंग कहा जाता है. भारत में भगवान शिव के कुल 12 ज्योतिर्लिंग हैं और इनका दर्शन व पूजा बहुत शुभ मानी जाती है.
भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम और घृष्णेश्वर शामिल हैं. हर ज्योतिर्लिंग का अपना अलग धार्मिक महत्व है और हर साल लाखों श्रद्धालु इनके दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अन्य शिवलिंगों की तुलना में ज्योतिर्लिंग की पूजा का विशेष महत्व माना गया है. कहा जाता है कि यदि कोई व्यक्ति हर सुबह श्रद्धा के साथ 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम का स्मरण करता है, तो उसे भगवान शिव का आशीर्वाद मिलता है और उसके पापों का नाश होता है. जो लोग सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन नहीं कर सकते, वे घर में उनका चित्र लगाकर भी श्रद्धा से पूजा कर सकते हैं.
अगर आप घर में ज्योतिर्लिंग का चित्र लगाना चाहते हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. चित्र को पूर्व या पश्चिम दिशा में लगाना शुभ माना जाता है. सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के चित्र एक साथ लगाने के बजाय अपनी श्रद्धा और जरूरत के अनुसार किसी एक ज्योतिर्लिंग का चित्र लगाना बेहतर माना जाता है.
चित्र लगाने के लिए सावन का महीना सबसे शुभ माना जाता है. इसके अलावा सोमवार, पूर्णिमा या महाशिवरात्रि के दिन भी इसे स्थापित किया जा सकता है. जहां ज्योतिर्लिंग का चित्र लगाया जाए, वहां दूसरे देवी-देवताओं के चित्र न लगाने की सलाह दी जाती है.
पूजा शुरू करने से पहले ज्योतिर्लिंग के सामने एक साफ पात्र रखें. सबसे पहले भगवान शिव का ध्यान करें और उन्हें बेलपत्र, फल, धूप और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें. इसके बाद 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करते हुए दोनों हाथों से जल अर्पित करें. फिर भगवान शिव के किसी भी मंत्र की कम से कम 3 माला और अधिक से अधिक 11 माला का जाप करें. पूजा पूरी होने के बाद भगवान शिव का ध्यान करें, 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम का स्मरण करें और अंत में उनसे क्षमा प्रार्थना करें.