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Jyotish Peeth Shankaracharya: ज्योतिष पीठ का असली शंकराचार्य कौन? अविमुक्तेश्वरानंद और वासुदेवानंद सरस्वती कैसे फिर इस पद को लेकर आए आमने-सामने, जानिए इसकी वजह

ज्योतिष पीठ का विवाद एक बार फिर सतह पर आ गया है. ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य को लेकर विवाद शुरू हो गया है. अविमुक्तेश्वरानंद और वासुदेवानंद सरस्वती इस पद को लेकर आमने-सामने आ गए हैं.  यहां आप पूरा मामला जान सकते हैं. 

Vasudevananda Saraswati and Avimukteshwaranand (File Photo) Vasudevananda Saraswati and Avimukteshwaranand (File Photo)

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य को लेकर एक बार फिर विवाद शुरू हो गया है, आखिर इस पीठ का शंकराचार्य कौन है? यह विवाद अब इसलिए चर्चा में है क्योंकि अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को बतौर ज्योतिष पीठ शंकराचार्य के तौर पर न सिर्फ शामिल किया गया बल्कि अयोध्या की नई बनी धार्मिक समिति में भी उन्हें स्थान दिया गया है. इसके बाद से अविमुक्तेश्वरानंद भड़क उठे हैं और और ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य घोषित किए जाने पर लीगल नोटिस देने का ऐलान कर दिया है. उधर, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने जो प्रेस रिलीज जारी की उसमें वासुदेवानंद सरस्वती को परम पूज्य जगतगुरु शंकराचार्य ज्योतिषपीठाधिपति कहकर संबोधित किया गया है.

असली शंकराचार्य आखिर कौन?
क्या अविमुक्तेश्वरानंद ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं, जो स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के वारिस हैं या फिर वासुदेवानंद सरस्वती, जो पिछले दो दशकों से ज्योतिष पीठ पर शंकराचार्य के पद का दावा करते आए हैं. दरअसल, 2019-20 में अदालत ने कुंभ के दौरान जमीन दिए जाने को लेकर जो फैसला दिया था, उसमें स्वामी स्वरूपानंद को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य मान लिया था, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद उनकी वसीयत के मुताबिक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य घोषित किया गया. हालांकि सुप्रीम कोर्ट में अभी भी यह मामला चल रहा है लेकिन लोगों ने लगभग मान लिया था कि अविमुक्तेश्वरानंद ही ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं.

ज्योतिष पीठ पर कर रहे अपना दावा
स्वामी वासुदेवानंद पिछले तीन दशकों से न सिर्फ ज्योतिष पीठ पर अपना दावा कर रहे हैं बल्कि अदालत की लड़ाई भी लड़ रहे हैं. चुकी है मामला अदालत में विचाराधीन है इसलिए ना तो केंद्र सरकार और ना ही योगी सरकार ने ऐलानिया तौर पर इन दोनों में से किसी को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य माना. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तो 13 फरवरी को उत्तर प्रदेश के विधानसभा में अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य मानने से इंकार कर दिया था. उन्होंने कह दिया था कि कोई खुद को शंकराचार्य घोषित नहीं कर सकता. दरअसल, योगी का इशारा स्वामी स्वरूपानंद की मृत्यु के बाद उनकी उसे कथित वसीयत पर था जिसके मताबिक अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य बनाया गया था. 

एक बार फिर लड़ाई आई सतह पर 
असली शंकराचार्य की यह लड़ाई अब केंद्र और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और अविमुक्तेश्वरआनंद के बीच छिड़ती दिख रही है. अयोध्या मामले में जिस तरीके से अविमुक्तेश्वरानंद ने मोर्चा खोला, उसके बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने वासुदेवानंद को अपनी धार्मिक समिति में बतौर ज्योतिष पीठ शंकराचार्य के तौर पर शामिल कर लिया. अब एक बार फिर असली शंकराचार्य की  लड़ाई सतह पर आ गई है. अब अयोध्या के साधु-संतों और केंद्र और योगी सरकार की नजर में वासुदेवानंद महाराज ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं जबकि अभी मुक्तेश्वर आनंद उनकी नजरों में एक संत मात्र हैं. दरअसल, स्वरूपानंद सरस्वती के वक्त 2019-20 में जो विवाद थम सा गया था, अब फिर से सुर्खियों में आ गया है. ऐसा लगता है सरकार ने यह मान लिया है कि वासुदेवानंद महाराज ही ज्योतिष पीठ के असली शंकराचार्य हैं.