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आर्टिफिशियल पेड़ से शुद्ध होगी हवा, यूनिक रिसर्च कर रही CIMFR की महिला वैज्ञानिक

झारखंड के धनबाद में CIMFR की महिला वैज्ञानिक डॉ. वी. एंगुलसेल्वी एक नई तकनीक पर काम कर रही हैं. वो 'स्मार्ट एल्गल लिक्विड ट्री' यानी SALT नाम की एक नई तकनीक भी विकसित कर रही है. यह एल्गी आधारित एक कृत्रिम पेड़ है, जो हवा से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर वातावरण को शुद्ध करने में मदद करता है.

Dhanbad Unique research Dhanbad Unique research

Central Institute of Mining and Fuel Research की महिला वैज्ञानिक विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नई मिसाल पेश कर रही हैं. कोयला अनुसंधान संस्थान सिंफर डिगवाडीह में प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ वी एंगुसेल्वी ऐसी तकनीकों पर शोध कर रही हैं, जो कचरे से ऊर्जा बनाने के साथ-साथ प्रदूषण को कम करने में भी मददगार साबित हो सकती हैं. इन शोधों में बायो-माइनिंग, कचरे से बायो-सीएनजी उत्पादन और एल्गी आधारित एयर प्यूरीफिकेशन तकनीक शामिल है.

नई तकनीक पर काम कर रही महिला वैज्ञानिक-
प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ वी एंगुसेल्वी बायो-माइनिंग तकनीक पर रिसर्च कर रही है. यह एक पर्यावरण के अनुकूल प्रक्रिया है, जिसके जरिए अयस्क और खनन अपशिष्ट से रेयर अर्थ एलिमेंट्स, खनिज और अन्य कीमती तत्वों की रिकवरी की जा सकती है. इस तकनीक में फंगस, बैक्टीरिया, एल्गी और पौधों जैसे सूक्ष्म जीवों की मदद ली जाती है. ये सूक्ष्मजीव अपनी जैविक क्रियाओं के जरिए खनिजों को घोलकर धातु तत्वों को अलग करने में मदद करते हैं. पारंपरिक खनन तकनीकों की तुलना में यह प्रक्रिया कम लागत वाली और पर्यावरण के लिए सुरक्षित मानी जाती है.

स्मार्ट एल्गल लिक्विड ट्री तकनीक पर काम-
सिंफर की प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. वी एंगुसेल्वी ने बताया कि बायो-माइनिंग एक सस्टेनेबल तकनीक है, जिसमें सूक्ष्म जीवों की मदद से कम ग्रेड के अयस्क और खनन अपशिष्ट से भी रेयर अर्थ एलिमेंट्स की रिकवरी की जा सकती है. इससे पर्यावरण को नुकसान भी कम होता है और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो पाता है. इसके साथ ही कचरे से बायो-सीएनजी उत्पादन की तकनीक पर भी रिसर्च कर रही है. बायो-सीएनजी एक स्वच्छ और नवीकरणीय ईंधन है, जिसे भोजन के कचरे, नगर निगम के ठोस कचरे और कृषि अवशेष से बनने वाली बायोगैस को शुद्ध करके तैयार किया जाता है.

उन्होंने बताया कि शुद्धिकरण के बाद इसमें 90 से 95 प्रतिशत तक मीथेन होती है, जिससे यह उच्च ऊर्जा क्षमता वाला ईंधन बन जाता है. इससे एक तरफ कचरे का बेहतर प्रबंधन संभव है, तो दूसरी तरफ स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन भी किया जा सकता है. मुख्य रूप से फूड वेस्ट और म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट से बायो-सीएनजी उत्पादन पर काम कर रहे हैं. इससे कचरे की समस्या को कम करने के साथ-साथ स्वच्छ ईंधन तैयार किया जा सकता है. वहीं 'स्मार्ट एल्गल लिक्विड ट्री' यानी SALT नाम की एक नई तकनीक भी विकसित कर रही है. यह एल्गी आधारित एक कृत्रिम पेड़ है, जो हवा से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर वातावरण को शुद्ध करने में मदद करता है.

महिला वैज्ञानिक से सीखते हैं छात्र-
छात्रों को भी इससे बड़ी मदद मिल रही है. छात्रा सुदप्ता अली ने बताया कि इनके साथ काम करते बहुत अच्छा लगता हैं. मैडम को काफी जानकारी हैं. काफी मदद करती हैं. हर चीज को सीखने का मौका देती हैं. यहां पर आजादी के साथ काम करते हैं  और यह मैडम से रिसर्च से रिलेटेड बहुत कुछ सीखा हैं. जबकि छात्र जितेंद का कहना है कि यहां पर काफी दिनों से काम कर रहे हैं. यह काफी अनुभव हैं, क्योंकि काफी सालों से मैडम रिसर्च कर रही हैं.

(सिथुन मोदक की रिपोर्ट)

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