aluminium
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दुनिया भर में मोबाइल, कंप्यूटर, गाड़ियां और दवाइयों से लेकर प्लास्टिक तक बनाने में कई तरह की धातुओं का इस्तेमाल होता है. इनमें से कुछ धातुएं जैसे प्लैटिनम और पैलेडियम बहुत कीमती होती हैं. इन्हें निकालना महंगा भी है और पर्यावरण के लिए नुकसानदेह भी. ऐसे में वैज्ञानिक लंबे समय से किसी सस्ते और आसानी से मिलने वाले विकल्प की तलाश में थे. अब इसमें बड़ी सफलता मिली है.
एल्यूमिनियम का नया रूप
King’s College London के वैज्ञानिकों ने एल्यूमिनियम का एक नया और अनोखा रूप खोजा है. एल्यूमिनियम धरती की ऊपरी सतह में सबसे ज्यादा पाए जाने वाले धातुओं में से एक है. यह सस्ता भी है और आसानी से उपलब्ध भी. लेकिन अब तक यह माना जाता था कि एल्यूमिनियम की रिएक्टिविटी सीमित होती है. नई खोज ने इस धारणा को चुनौती दी है.
Nature Communications में पब्लिश हुई स्टडी
इस रिसर्च को लीड किया केमिस्ट्री डिपार्टमेंट के वैज्ञानिक Clare Bakewell ने. उनकी टीम ने एल्यूमिनियम आधारित ऐसे अणु (मॉलिक्यूल) तैयार किए जो बेहद मजबूत केमिकल बॉन्ड को भी तोड़ सकते हैं. यह खोज प्रतिष्ठित जर्नल Nature Communications में प्रकाशित हुई है.
'साइक्लोट्रायल्यूमेन' नाम का नया कंपाउंड
इस अध्ययन की सबसे बड़ी उपलब्धि है 'साइक्लोट्रायल्यूमेन' नाम का एक नया कंपाउंड. इसमें एल्यूमिनियम के तीन परमाणु आपस में जुड़कर त्रिकोण जैसी संरचना बनाते हैं. खास बात यह है कि यह तीन-परमाणु वाला ढांचा अलग-अलग घोल में भी स्थिर रहता है, जबकि इसकी रिएक्टिविटी काफी ज्यादा है.
यह संरचना कई अहम रासायनिक प्रक्रियाओं में हिस्सा ले सकती है. उदाहरण के लिए, यह डाइहाइड्रोजन (हाइड्रोजन गैस) को तोड़ सकती है और एथीन जैसे हाइड्रोकार्बन के साथ नियंत्रित तरीके से नई चेन बना सकती है. एथीन रसायन उद्योग में एक अहम कच्चा माल है, जिससे प्लास्टिक समेत कई उत्पाद बनाए जाते हैं. आज ज्यादातर औद्योगिक रासायनिक प्रतिक्रियाओं में ट्रांजिशन मेटल्स का इस्तेमाल होता है. खासकर कैटेलिसिस यानी रिएक्शन को तेज करने की प्रक्रिया में प्लैटिनम जैसी धातुएं जरूरी मानी जाती हैं. लेकिन ये धातुएं सीमित मात्रा में मिलती हैं और कई बार राजनीतिक रूप से अस्थिर क्षेत्रों में पाई जाती हैं, जिससे इनकी कीमत और भी बढ़ जाती है.
कीमती धातुओं से लगभग 20,000 गुना सस्ता
एल्यूमिनियम प्लैटिनम और पैलेडियम जैसी धातुओं से लगभग 20,000 गुना सस्ता है. अगर इसे बड़े पैमाने पर रासायनिक प्रक्रियाओं में इस्तेमाल किया जा सका, तो उद्योगों की लागत काफी कम हो सकती है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह नया एल्यूमिनियम यौगिक सिर्फ ट्रांजिशन मेटल्स की नकल नहीं कर रहा, बल्कि उनसे आगे बढ़कर नई तरह की रासायनिक प्रतिक्रियाओं का रास्ता खोल रहा है.