Cancer Diagnosis
Cancer Diagnosis
क्या आपने मशहूर सीरीज ब्रेकिंग बैड देखी है? बेहतरीन सिनेमा और वेब सीरीज के शौकीनों ने लाइफ में एक बार तो ये सीरीज जरूर देखी होगी. इसमें एक सीधे-सादे केमिस्ट्री टीचर को कैंसर होता है और फिर वो अपराध की दुनिया में उतर जाता है. अब एक नई स्टडी ने कुछ ऐसा ही चौंकाने वाला ट्रेंड दिखाया है. स्टडी के मुताबिक कैंसर डायग्नोसिस के कुछ साल बाद लोगों में अपराध करने की टेंडेंसी बढ़ जाती है.
डेनमार्क की स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा
यह रिसर्च अमेरिकी जर्नल Applied Economics में पब्लिश हुई है. इसमें डेनमार्क के 3 लाख 68 हजार से ज्यादा लोगों के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिन्हें 1980 से 2018 के बीच कैंसर का पता चला था. शोधकर्ताओं ने स्वास्थ्य, रोजगार, आय, शिक्षा और आपराधिक रिकॉर्ड से जुड़े सरकारी आंकड़ों को मिलाकर यह समझने की कोशिश की कि कैंसर के बाद लोगों के व्यवहार में क्या बदलाव आता है. इन मरीजों की तुलना उन लोगों से की गई, जिन्हें कैंसर नहीं था.
इलाज के पहले साल घटता है अपराध
स्टडी के मुताबिक, कैंसर का पता चलने के पहले साल में अपराध दर घट जाती है. इसकी वजह यह है कि मरीज उस समय कीमोथेरेपी और रेडिएशन से गुजर रहा होता है और शारीरिक रूप से कमजोर रहता है. लेकिन दो साल बाद तस्वीर बदलने लगती है. कैंसर के बाद मरीजों में अपराध के लिए दोषी ठहराए जाने की संभावना बढ़ जाती है. अधिकतर मामले छोटे अपराधों जैसे शॉपलिफ्टिंग (दुकान से चोरी) या ड्रग्स रखने से जुड़े थे. हालांकि कुछ मामलों में हिंसक अपराध भी बढ़े पाए गए.
क्या वजह हो सकती है?
शोधकर्ताओं ने इसके पीछे आर्थिक कारणों को अहम माना है. डेनमार्क में सभी को हेल्थ इंश्योरेंस मिलता है, इसलिए इलाज का खर्च सीधा कारण नहीं माना गया. फिर भी कैंसर के बाद रोजगार की संभावना 1.5% तक कम हो जाती है. जो लोग नौकरी पर बने रहते हैं, उनकी आय और काम के घंटे कम हो जाते हैं. जिन मरीजों की आय में सबसे ज्यादा गिरावट आई, उनमें अपराध की संभावना भी ज्यादा देखी गई.
जीवन प्रत्याशा का असर
स्टडी में यह भी पाया गया कि जिन मरीजों की पांच साल जीवित रहने की संभावना कम थी, उनमें अपराध का जोखिम ज्यादा था. संभव है कि कम जीवन प्रत्याशा के कारण लोग लंबे समय के दंड से कम डरें. 2007 में डेनमार्क में सामाजिक सहायता नीतियों में बदलाव के बाद जिन क्षेत्रों में वेलफेयर सपोर्ट कम हुआ, वहां यह प्रभाव ज्यादा दिखा. इससे संकेत मिलता है कि मजबूत सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था ऐसे जोखिम को कम कर सकती है.