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5am Myth: क्या सुबह 5 बजे उठना ही सफलता की कुंजी है? जानिए साइंस क्या कहती है

रिसर्च बताती है कि नींद का समय और जागने का पैटर्न आंशिक रूप से हमारे जीन से तय होता है. यानी अगर आपके परिवार में लोग देर रात तक जागते हैं, तो आपके नाइट आउल होने की संभावना ज्यादा हो सकती है.

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आजकल सोशल मीडिया पर सुबह 5 बजे उठने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. कोल्ड प्लंज, जर्नल लिखना, सूरज उगने से पहले दौड़ना. इन सभी को हाई परफॉर्मर रूटीन बताया जाता है. टिम कुक, जेनिफर एनिस्टन और अक्षय कुमार जैसे सेलिब्रिटीज भी जल्दी उठने के लिए जाने जाते हैं.

दुनिया के लिए इनका मैसेज साफ है, जल्दी उठो और ज्यादा सफल बनो. लेकिन क्या वाकई ऐसा है? रिसर्च बताते हैं कि यह कहानी इतनी सीधी नहीं है. असल में, सब कुछ आपके शरीर की जैविक घड़ी यानी 'क्रोनोटाइप' पर निर्भर करता है.

क्या होता है क्रोनोटाइप?
क्रोनोटाइप (Chronotype) हमारे शरीर की प्राकृतिक जैविक लय है, जो तय करती है कि हम कब सबसे ज्यादा सतर्क या नींद में महसूस करते हैं. यह हमारी सर्कैडियन रिदम से जुड़ा होता है.

क्या यह जेनेटिक है?
रिसर्च बताती है कि नींद का समय और जागने का पैटर्न आंशिक रूप से हमारे जीन से तय होता है. यानी अगर आपके परिवार में लोग देर रात तक जागते हैं, तो आपके नाइट आउल होने की संभावना ज्यादा हो सकती है.

मॉर्निंग टाइप और ईवनिंग टाइप लोगों में अंतर
1. मॉर्निंग टाइप

  • सुबह जल्दी उठते हैं

  • बिना अलार्म के जाग जाते हैं

  • सुबह सबसे ज्यादा ऊर्जा महसूस करते हैं

  • पढ़ाई और ऑफिस के टाइमटेबल में आसानी से फिट हो जाते हैं

2. ईवनिंग टाइप

  • देर रात ज्यादा एक्टिव रहते हैं

  • सुबह उठने में परेशानी होती है

  • रात में बेहतर फोकस और क्रिएटिविटी

अध्ययनों में पाया गया है कि मॉर्निंग टाइप छात्रों का अकादमिक प्रदर्शन औसतन बेहतर होता है. वे धूम्रपान, शराब और ड्रग्स का कम सेवन करते हैं और नियमित व्यायाम की संभावना ज्यादा होती है. दूसरी तरफ, ईवनिंग टाइप लोगों में बर्नआउट, तनाव और खराब मानसिक स्वास्थ्य की दर अधिक पाई गई है.

सोशल जेटलैग क्या है?
जब आपकी जैविक घड़ी और समाज की समय-सारणी में टकराव होता है, तो उसे सोशल जेटलैग कहा जाता है. मान लीजिए अगर आप प्राकृतिक रूप से रात 1 बजे सोते हैं, लेकिन ऑफिस के लिए सुबह 6 बजे उठना पड़ता है, तो यह आपके शरीर के लिए लगातार टाइम जोन बदलने जैसा है. ऐसे लोगों में थकान और मूड स्विंग, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की दिक्कतें हो सकती हैं. इसलिए हर किसी को सुबह 5 बजे उठने की सलाह देना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है.

क्या जल्दी उठना सफलता की गारंटी है?
वैज्ञानिकों का मानना है कि सफलता का असली कारण जल्दी उठना नहीं, बल्कि अपनी जैविक लय के अनुसार काम करना है. मॉर्निंग टाइप लोग इसलिए सफल दिखते हैं क्योंकि हमारी शिक्षा और कार्य प्रणाली सुबह के हिसाब से बनी है. जो लोग जैविक रूप से सुबह सक्रिय होते हैं, उन्हें सिस्टम का फायदा मिल जाता है. अगर कोई ईवनिंग टाइप व्यक्ति जबरदस्ती जल्दी उठता है, तो हो सकता है कि उसकी नींद पूरी न हो, ध्यान केंद्रित करने में समस्या हो या मूड खराब रहे. शुरुआत में जल्दी उठने से मोटिवेशन का असर दिख सकता है, लेकिन यह स्थायी जैविक बदलाव नहीं होता.

कैसे पहचानें अपना क्रोनोटाइप?

  • स्लीप लॉग रखें- छुट्टी के दिन बिना अलार्म कब उठते हैं?

  • नींद आने में कितना समय लगता है?- 30 मिनट से कम में नींद आ जाए तो समय एकदम ठीक है.

  • एनर्जी लेवल नोट करें- दिन में कब सबसे ज्यादा अलर्ट महसूस करते हैं?

  • डेलाइट सेविंग टाइम में प्रतिक्रिया देखें- समय बदलने पर शरीर कैसे प्रतिक्रिया देता है?