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3D-Printed Rocket Engine: न काटने की… न वेल्डिंग की जरूरत, ISRO ने बनाया 3डी प्रिंटेड रॉकेट, इस तकनीक से  60% तक तेज होगा प्रोडक्शन 

इस नई तकनीक ने पार्ट्स की संख्या को 14 से घटाकर केवल एक टुकड़े में करने में मदद की है. इससे 19 वेल्डिंग जॉइंट से भी छुटकारा मिल गया है. इसका मतलब है कि इंजन बनाने के लिए उन्हें बहुत कम सामान की जरूरत पड़ेगी.

3D-Printed Rocket Engine (Photo: ISRO) 3D-Printed Rocket Engine (Photo: ISRO)
हाइलाइट्स
  • प्रोडक्शन में आएगी तेजी 

  • नया खिलाड़ी है 3डी प्रिंटेड रॉकेट

भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो ने हाल ही में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. इसरो ने 3डी प्रिंटेड रॉकेट इंजन बनाया है. एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग विशेष तकनीक का उपयोग करके PS4 नामक एक नए प्रकार के इंजन का टेटस किया है. इसे 3D प्रिंटिंग के रूप में भी जाना जाता है. यह इंजन पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) का एक जरूरी हिस्सा है, जिसका उपयोग सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने के लिए किया जाता है.

प्रोडक्शन में आएगी तेजी 

ये टेस्ट 9 मई को किया गया था. टेस्ट में इंजन लंबे समय तक, लगभग 665 सेकंड तक चला. आमतौर पर इस तरह का इंजन कई टुकड़ों को एक साथ काटकर और वेल्डिंग करके बनाया जाता है. लेकिन इस बार इसरो ने 3डी प्रिंटिंग का इस्तेमाल कर इसे एक टुकड़े में बनाया है. इसरो के अनुसार, इस नए तरीके से करीब 97% चीजों को बचाया जा सकता है. साथ ही इसकी मदद से प्रोडक्शन को 60% तक तेज किया जा सकता है. 

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फोटो-ISRO
फोटो-ISRO

लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम सेंटर में बनाया गया है 

PS4 इंजन PSLV रॉकेट का एक जरूरी हिस्सा है. इसका उपयोग रॉकेट के चौथे चरण में किया जाता है, जहां इसे अंतरिक्ष में काम करना होता है. यह इंजन फ्यूल के रूप में नाइट्रोजन टेट्रोक्साइड और मोनो मिथाइल हाइड्राजिन नाम के स्पेशल केमिकल का उपयोग करता है. इसे इसरो के लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम सेंटर (LPSC) ने बनाया है. 

LPSC ने इंजन डिजाइन में कुछ बदलाव किए ताकि इसे 3डी प्रिंटिंग का उपयोग करके बनाया जा सके. इस नई तकनीक ने पार्ट्स की संख्या को 14 से घटाकर केवल एक टुकड़े में करने में मदद की है. इससे 19 वेल्डिंग जॉइंट से भी छुटकारा मिल गया है. इसका मतलब है कि इंजन बनाने के लिए उन्हें बहुत कम सामान की जरूरत पड़ेगी.

नया खिलाड़ी है 3डी प्रिंटेड रॉकेट

दरअसल, स्पेस इनोवेशन में 3डी प्रिंटेड रॉकेट के नए खिलाड़ी के रूप में उभरा है. इसमें 3डी-प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग करके परत दर परत हिस्सों को बनाया जाता है. पारंपरिक रॉकेटों के विपरीत, जिन्हें कई टुकड़ों से इकट्ठा किया जाता है, 3डी-मुद्रित रॉकेट जॉइंट, या वेल्ड से हटाकर बनाया जाता है. इससे न केवल रॉकेट का वजन कम होता है बल्कि फ्यूल एफिशिएंसी भी बढ़ती है.