Artemis II Mission (Photo/PTI)
Artemis II Mission (Photo/PTI)
नासा के मिशन आर्टेमिस-2 मिशन इतिहास रच दिया. 4 अंतरिक्ष यात्रियों के साथ ओरियन स्पेसक्राफ्ट ने चंद्रमा के चारों तरफ यात्रा की. अंतरिक्ष यात्रियों को 40 मिनट तक ब्लैकआउट में रहना पड़ा. इसका मतलब है कि इतनी देर तक उनका धरती से कोई कनेक्शन नहीं था.
चारों क्रू मेंबर्स चांद के उस हिस्से की परिक्रमा कर रहे थे, जिसे अब तक किसी ने नहीं देखा था. चंद्रमा की इस परिक्रमा को विज्ञान की भाषा में लूनर फ्लायबाय कहा जाता है.
ये नासा के मिशन आर्टेमिस-2 का बेहद अहम चरण है. वो चरण, जहां अभी तक कोई नहीं पहुंचा था. ये वो पल है. जब इंसान धरती से सबसे ज्यादा दूर और चांद के अनदेखे हिस्से के बेहद करीब था. इस दौरान आर्टेमिस-2 की स्पेस जर्नी बेहद नाजुक मोड़ पर थी और 6 घंटे की फ्लाई-बाय स्टेज में पहली बार चंद्रमा के डार्क साइड पर मौजूद 965 किलोमीटर चौड़े ओरिएंटेल बेसिन गड्ढे दुनिया के सामने आए.
अपोलो-13 के 56 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा-
बेशक मिशन आर्टेमिस-2 अंतरिक्ष की रहस्यमयी दुनिया से पर्दा उठाने वाली यात्रा है. आर्टेमिस-2 ने धरती से सबसे ज्यादा दूर पहुंचकर अपोलो 13 के 56 सालों के रिकॉर्ड को तोड़ा. फ्लाई बाय के दौरान चालक दल, पृथ्वी से लगभग 250,000 मील से भी ज्यादा की दूरी पर थे. इस दौरान क्रू मेंबर्स ने चंद्रमा के अनदेखे हिस्से के कई स्थानों का नामकरण भी किया. जिनमें से एक का नाम आर्टेमिस II के कमांडर रीड वाइजमैन की दिवंगत पत्नी कैरोल वाइजमैन के सम्मान में रखा गया है. कैरोल वाइजमैन का कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद निधन हो गया था. घोषणा करते समय कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन भावुक हो गए और रीड वाइजमैन और दल के बाकी मेंबर्स ने उन्हें गले लगा लिया.
क्या होता है फ्लाईबाय स्टेज-
दरअसल फ्लाईबाय स्टेज का मतलब उस चरण से है, जब ओरियन अंतरिक्ष यान चंद्रमा के करीब से गुजरा. यह मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो चंद्रमा के चारों ओर एक 'फ्री रिटर्न ट्रेजेक्टरी' का उपयोग करता है. इस दौरान स्पेस क्राफ्ट चंद्रमा की ग्रैविटी का इस्तेमाल करता है. इस दौरान इंजन को दोबारा चालू करने की जरुरत नहीं होती.
क्या है आर्टेमिस-2 मिशन?
आर्टेमिस-2, NASA के आर्टेमिस प्रोग्राम का दूसरा मिशन है. NASA का ये मिशन लगभग 10 दिन का है. ये अब तक की सबसे लंबी मानव अंतरिक्ष यात्रा मानी जा रही है. इसके जरिए अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से 4 लाख किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर चांद के करीब पहुंचे हैं.
ये मिशन 1972 के Apollo Mission के बाद पहला मौका है, जब अंतरिक्ष यात्री चांद के पास पहुंचे हैं. इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं. ये मिशन न सिर्फ तकनीकी परीक्षण है, बल्कि भविष्य में चांद पर इंसानों की स्थायी मौजूदगी की तैयारी भी है. 1 अप्रैल को भारतीय समय के अनुसार, सुबह लगभग 3 बजकर 54 मिनट पर फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से SLS रॉकेट को लॉन्च किया गया था और इसके साथ ही नासा ने आर्टेमिस 2 मिशन को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजने का एलान कर दिया.
कौन हैं 4 अंतरिक्ष यात्री?
50 साल के रीड वाइसमैन मिशन कमांडर हैं, जो चंद्रमा के पास जाने वाले सबसे उम्रदराज व्यक्ति हैं. जबकि विक्टर ग्लोवर इस मिशन के पायलट हैं और इस मिशन के अहम सदस्य क्रिस्टीना कोच हैं, जो मिशन स्पेशलिस्ट हैं. लो अर्थ ऑर्बिट से आगे चंद्रमा के पास जानेवाली पहली महिला हैं और कनाडा के जेरेमी हैनसेन मिशन स्पेशलिस्ट हैं और चंद्रमा के पास जाने वाले पहले गैर-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री हैं.
क्यों इतना महत्वपूर्ण है ये मिशन?
NASA ने पहली बार आर्टेमिस प्रोग्राम में अंतरिक्ष यात्रियों को भेजा. इस मिशन के जरिए ये देखा जा रहा है कि पूरा सिस्टम इंसानों के साथ ठीक से काम करता है या नहीं. साथ ही इस मिशन के जरिए ये भी जानना है कि अंतरिक्ष में शरीर पर क्या असर पड़ता है. रेडिएशन कितना नुकसान करता है. छोटे स्पेस में रहना कितना आसान या मुश्किल है. दरअसल ये मिशन इंसानों को चांद पर वापस ले जाने की तैयारी है. आगे के मिशन जैसे आर्टेमिस-3 और 4 में चांद पर लैंडिंग की तैयारी होगी.
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