शुवेलुच ज्वालामुखी (फोटो: विकिपीडिया)
शुवेलुच ज्वालामुखी (फोटो: विकिपीडिया)
धरती पर कई ज्वालामुखी मौजद हैं, जिनकी गिनती भी नहीं की जा सकती है. इनमें से कई जमीन या पानी के अंदर हैं और कुछ जमीन के ऊपर. कुछ ज्यादा खतरनाक हैं तो कुछ कम. लेकिन कई बार जब ज्वालामुखी में विस्फोट की खबरें भयावह होती हैं. कई बार ये कई सालों के बाद भी फटते हैं और बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं. अब कड़ी में वैज्ञानिकों का कहना है कि रूस के सुदूर पूर्वी कमचातका प्रायद्वीप में शुवेलुच ज्वालामुखी (Shiveluch volcano) किसी भी समय फट सकता है. बता दें, ये ज्वालामुखी पिछले 15 साल से शांत था.
रिंग ऑफ फायर वाली बेल्ट है ये
दरअसल, कमचातका (Kamchatka) 29 सक्रिय ज्वालामुखियों का घर है. ये जगह कोई आम जगह नहीं है, ये पृथ्वी के एक विशाल बेल्ट का हिस्सा है, जिसे "रिंग ऑफ फायर" (Ring of Fire) के रूप में जाना जाता है. रिंग ऑफ फायर प्रशांत महासागर के चारों तरफ फैली ज्वालामुखीय और भूकंपीय श्रृंखला है. इस क्षेत्र में सैकड़ों सक्रिय ज्वालामुखी हैं, जो भूकंप की वजह बनते हैं. यहां के अधिकांश ज्वालामुखी विरल आबादी वाले जंगल और टुंड्रा से घिरे हुए हैं, इसलिए स्थानीय लोगों को इससे कम खतरा है. लेकिन, बड़े विस्फोट कांच, चट्टान और राख को आसमान में फेंक सकते हैं, जिससे एयरक्राफ्ट को खतरा हो सकता है.
सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है शिवलुच
यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार, इस प्रकार के विस्फोट आम तौर पर कमचातका में साल में तीन या चार बार होते हैं, जिसके लिए हवाई यातायात को फिर से चलाने की आवश्यकता होती है. वहीं शिवलुच 3,283 मीटर (10,771 फीट) का है. जिसमें पिछले 10,000 साल में अनुमानित 60 विस्फोट हो चुके हैं. ये इस प्रायद्वीप का सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है.
पिछली बार सबसे शक्तिशाली विस्फोट 2007 में हुआ था
कमचातका वॉलकेनिक इरप्शन रिस्पांस टीम ने रविवार को कहा कि यह अब ज्यादा सक्रिय हो गया है, जिससे एक शक्तिशाली विस्फोट हो सकता है. ऑब्जर्वेटरी ने कहा, "इसमें लगातार लावा बन रहा है. जिसके फटने का डर है. इसमें से गर्म सल्फ्यूरस गैसें निकलती हैं”
जानकारों के मुताबिक, ज्वालामुखी के विस्फोट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को परेशानी हो सकती है. इसी को देखते हुए "ऑरेंज" अलर्ट के साथ इसे चिह्नित किया गया है. ऑरेंज अलर्ट का मतलब है कि इसके फटने की संभावना है. नासा के अनुसार पिछली बार सबसे शक्तिशाली विस्फोट साल 2007 में हुआ था.