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Human Psychology: सोशल मीडिया पर दिखती है दोस्त की सफलता, खुद से करने लगते हैं सवाल... आखिर मैंने क्या हासिल किया? क्या है इसकी वजह

अक्सर लोगों के साथ होता है कि अगर उन्हें अपने स्कूलमेट की सक्सेस के बारे में पता लगे, तो वह उसकी तुलना खुद से करने लगते हैं. बेशक वह भी अपने जीवन में सफल हो लेकिन तुलना वह जरूर करते हैं.

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क्या कभी आपने अपने पुराने क्लासमेट की सोशल मीडिया पोस्ट देखी है और अचानक अपनी लाइफ के बारे में सोचने लगे हों? जैसे ही पता चलता है कि स्कूल का कोई दोस्त अच्छी नौकरी कर रहा है, अपना बिजनेस चला रहा है या नया घर खरीद चुका है, मन में सवाल आ सकता है कि मैं अपनी जिंदगी में कहां पहुंचा हूं? साइकोलॉजी के अनुसार ऐसा होना जरूरी नहीं कि जलन की वजह से हो. यह खुद को दूसरों से तुलना की एक आम आदत हो सकती है.

क्यों होती है पुराने क्लासमेट से ही तुलना?

पुराने क्लासमेट हमारे लिए खास होते हैं क्योंकि कभी हम एक ही जगह से शुरू हुए थे. एक ही स्कूल, एक जैसी पढ़ाई और लगभग एक जैसा समय होने के कारण दिमाग उन्हें अपनी जिंदगी से जोड़कर देखता है. साइकोलॉजी की Social Comparison Theory के अनुसार, लोग कई बार अपनी स्थिति को बेहतर समझने के लिए दूसरों से तुलना करते हैं.

उनकी सफलता देखकर क्या होता है?

जब कोई पुराना दोस्त हमसे ज्यादा सफल दिखाई देता है, तो दिमाग अपनी कामयाबियों पर भी ध्यान देने लगता है. मन में एक साथ दो बातें आ सकती हैं, 'उसने बहुत अच्छा किया' और 'मैंने अब तक क्या हासिल किया?' इसका मतलब यह नहीं कि आप उससे जलते हैं. यह तुलना आपको अपनी जिंदगी और पुराने सपनों के बारे में सोचने पर मजबूर कर सकती है.

सोशल मीडिया बढ़ा देता है तुलना का असर

आज सोशल मीडिया के चलते पुराने दोस्तों की जिंदगी देखना बहुत आसान हो गया है. उनकी नई नौकरी, शादी, विदेश यात्रा, नया घर या बिजनेस कुछ ही सेकंड में सामने आ जाता है. परेशानी यह है कि हमें उनकी जिंदगी का सिर्फ अच्छा हिस्सा दिखाई देता है. अपनी जिंदगी में हम परेशानियां भी जानते हैं, लेकिन दूसरे की सिर्फ कामयाबियां देखते हैं. इससे तुलना गलत भी लग सकती है.

असली तुलना शायद खुद से होती है

कई बार पुराने क्लासमेट की सफलता हमें अपने पुराने सपनों की याद दिलाती है. हो सकता है कि आपको उसका काम नहीं चाहिए, लेकिन उसे देखकर याद आए कि कभी आपका भी कोई सपना था जिसे आपने पूरा नहीं किया. ऐसे में तुलना असल में उस व्यक्ति से कम और अपने पुराने रूप से ज्यादा होती है.

तुलना हमेशा बुरी नहीं होती

दूसरों से तुलना करना हमेशा गलत नहीं है. कभी-कभी इससे आपको पता चलता है कि आप क्या चाहते हैं. लेकिन अगर तुलना लगातार दुख, पछतावे या खुद को कम समझने की वजह बन रही है, तो इससे दूरी बनाना बेहतर है. हर व्यक्ति की जिंदगी में सफलता की अलग-अलग समय आती है. किसी पुराने क्लासमेट की सफलता आपकी कीमत तय नहीं करती.