डोल पूर्णिमा के मौके पर पुरी के विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में भव्य डोल यात्रा का आयोजन किया गया। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की विशेष पूजा अर्चना के बाद उन्हें पालकी में बैठाकर रंग और गुलाल के बीच भ्रमण कराया गया। इस खास दिन पर 138 तरह के आभूषणों से भगवान का शृंगार किया गया, जिसे राज राजेश्वर देश भी कहा जाता है। महाप्रभु ने अपने सोना वेश यानी सवर्ण वेश में भक्तों को दर्शन दिए। डोल पूर्णिमा का यह उत्सव ओडिशा के साथ बंगाल और असम में भी हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कोलकाता के गोल्फ ग्रीन सेंट्रल पार्क में डोल उत्सव और शांतिनिकेतन शैली का वसंत उत्सव धूमधाम से मनाया गया। जयपुर में गुलाल गोटा की धूम रही, जो राजघराने की सदियों पुरानी परंपरा है। लखनऊ में साठ हजार रुपए किलो की सोने की गुजिया भी चर्चा में रही।