ब्रज की होली पूरी दुनिया में मशहूर है और हर दिन की होली अपने आप में बेहद खास होती है। गोकुल में आज छड़ीमार होली खेली गई। गोकुल में भगवान को बाल स्वरूप में पूजा जाता है इसलिए यहां लठमार होली नहीं बल्कि छड़ीमार होली खेली जाती है ताकि नन्हे कान्हा को चोट न लगे। बाल गोपाल को फूलों से सजी पालकी में बैठाकर नंद भवन से मुरलीधर घाट ले जाया गया। द्वारकाधीश मंदिर में बगीचा होली खेलने की परंपरा है जहां भगवान के दरबार में होली के लिए खास बगीचा सजाया जाता है। गुजरात के नर्मदा जिले में रसिया होली खेलने की परंपरा है जहां वैष्णव समाज की महिलाएं चालीस दिन पहले से होली का उत्सव शुरू कर देती हैं। छोटा उदयपुर में भिंगोरियों मेला का आयोजन किया गया। झांसी के खाटूश्याम मंदिर में होली पर भव्य उत्सव का आयोजन किया गया जहां वृंदावन से आए कलाकारों ने भक्तों का जोश बढ़ाया। प्रयागराज में किन्नर समाज ने पारंपरिक अंदाज में होली खेली।