भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से 10 दिवसीय गणेश उत्सव की शुरुआत हो रही है, जिसका समापन अनंत चतुर्दशी पर होगा. ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार गणेश चतुर्थी पर बुध का स्वराशि गोचर, गजकेसरी योग, रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार गणपति स्थापना के लिए तुला लग्न का समय निर्धारित किया गया है. घर में गृहस्थ जीवन के लिए बाईं सूंड वाली मिट्टी की प्रतिमा स्थापित करने का विधान बताया गया है. पूजा प्रक्रिया में पंचामृत स्नान, कलश स्थापना, दुर्वा अर्पण और मोदक के भोग से जुड़े नियम शामिल हैं. इसके साथ ही गणेश जी के 32 स्वरूपों के महत्व, अलग-अलग रंगों की प्रतिमाओं की पूजा और डेढ़, तीन, पांच, सात, नौ या दस दिनों के विसर्जन नियमों पर विस्तृत जानकारी दी गई है.