उत्तराखंड में स्थित त्रियुगी नारायण मंदिर आध्यात्मिक शादियों के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है. यह वही स्थान है जहाँ भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुआ था और यहाँ तीन युगों से एक अखंड ज्योति जल रही है. इस मंदिर में आध्यात्मिक विवाह की मांग तेजी से बढ़ रही है, जहाँ डेढ़ से दो लाख रुपये के पैकेज में संस्कार, सजावट और फोटोग्राफी जैसी सभी व्यवस्थाएं शामिल होती हैं. इस बढ़ती प्रवृत्ति के साथ अयोध्या और बनारस जैसे शहर भी ऐसे आयोजनों के लिए लोकप्रिय हो रहे हैं. इसी क्रम में, अयोध्या में श्री राम मंदिर से लगभग डेढ़-दो किलोमीटर दूर सरयू नदी के किनारे एक अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय का निर्माण किया जा रहा है. इसका उद्देश्य 300 से अधिक भाषाओं में लिखी गई रामकथा की पांडुलिपियों को संरक्षित करना है. संग्रहालय के लिए देश-विदेश से पचासी लोग अपनी पांडुलिपियां सौंपने हेतु संपर्क कर चुके हैं.